9वीं-10वीं के 7% छात्र पूरी नहीं कर पाते स्कूली शिक्षा, यूपी-बिहार समेत कई राज्यों में सुधार
नई दिल्ली। सरकार के लगातार प्रयासों के बावजूद देश में 9वीं से 10वीं कक्षा के करीब 7 प्रतिशत छात्र अपनी स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर पा रहे हैं। स्कूली शिक्षा की इन्हीं कक्षाओं में ड्रॉपआउट दर राष्ट्रीय औसत सात प्रतिशत है। यानी इतने छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं और आगे कहीं दाखिला भी नहीं लेते।
रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक में इन कक्षाओं की ड्रॉपआउट दर देश में सबसे अधिक 18.1 प्रतिशत है। इसके बाद गुजरात और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी स्थिति अपेक्षाकृत गंभीर बनी हुई है।
वहीं, उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा की स्थिति में लगातार सुधार दर्ज किया गया है। इन राज्यों की ड्रॉपआउट दर राष्ट्रीय औसत से बेहतर बताई गई है।
उत्तर प्रदेश: 8.4%
बिहार: 7%
मध्य प्रदेश: 13%
राजस्थान: 8.8%
पिछले वर्षों की तुलना में सुधार
स्कूली शिक्षा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में देश में ड्रॉपआउट दर में लगातार सुधार हुआ है। हालांकि, माध्यमिक स्तर (9वीं-10वीं) पर सुधार की गति अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
2022-23: 13.8%
2023-24: 10.9%
2024-25: 7%
यानी पिछले वर्ष की तुलना में ड्रॉपआउट दर में केवल 1.2 प्रतिशत की कमी आई है।
प्राथमिक और मध्य स्तर पर भी गिरावट
मध्य स्तर पर ड्रॉपआउट दर 2022 में 8.1% से घटकर 2024-25 में 3.6% हो गई।
प्राथमिक स्तर पर यह 8.7% से घटकर 1.8% रह गई है।
कई राज्यों में सुधार, कुछ में बढ़ी ड्रॉपआउट दर
सरकार ने 16 मई 2026 को संसद में पेश यूडीआईएसई+ (UDISE+) रिपोर्ट के मुताबिक, 2020-21 से 2024-25 के बीच माध्यमिक स्तर पर कई राज्यों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उत्तर प्रदेश: 13.2% से घटकर 8%
उत्तराखंड: 6.9% से घटकर 3%
पंजाब: 11.1% से घटकर 5.2%
हरियाणा: 8.9% से घटकर 4.1%
हिमाचल प्रदेश: 7.1% से घटकर 4.8%
हालांकि, कुछ राज्यों में ड्रॉपआउट दर बढ़ी भी है—
तमिलनाडु: 4.6% से बढ़कर 12.2%
दिल्ली: 5.1% से बढ़कर 5.8%
चंडीगढ़: 0% से बढ़कर 1.1%
रिपोर्ट के अनुसार, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, लेकिन माध्यमिक स्तर पर अभी भी छात्रों को विद्यालय से जुड़े रखने के लिए अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता है।

