14 July 2026

आत्महत्या के लिए उकसाना अमानवीय... प्रोफेसर को अग्रिम जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट का इंकार: ऐसे व्यवहार के बाद शिक्षक बच नहीं सकते

केरल में दलित छात्र आत्महत्या मामले में कहा, ऐसे व्यवहार के बाद शिक्षक बच नहीं सकते

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केरल के एक छात्र को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी प्रोफेसर को यह कहते हुए अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया कि उनके कृत्य के लिए अमानवीय के अलावा कोई अन्य शब्द इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि शिक्षक इस तरह के व्यवहार के बाद बच नहीं सकता है।


जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील डीएस नायडू से कहा, "एक संदेश जाना चाहिए कि आप (शिक्षक) छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार नहीं कर सकते।"

कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को समझना चाहिए कि उसके कार्यों का छात्रों पर क्या असर पड़ेगा। यदि किसी छात्र को कक्षा में सहपाठियों की मौजूदगी में ऐसे अपमानित किया जाता है, तो ऐसे लोगों पर इसका क्या प्रभाव होगा? सुप्रीम कोर्ट ने प्रोफेसर के वकील की इस दलील को खारिज कर दिया कि कक्षा में अपमानित करने की कथित घटना को एक माह बाद आत्महत्या से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि कक्षा में अपमानित करने का क्या नतीजा होगा, इसका अंदाजा होना चाहिए। शिक्षकों को अपने व्यवहार के प्रभाव को समझना चाहिए।

मृत पाया गया था छात्र

कन्नूर डेंटल कॉलेज में बीडीएस प्रथम वर्ष का छात्र नितिन राज 10 अप्रैल को परिसर में इमारत से गिरने के बाद मृत पाया गया था। इसे आत्महत्या का संदिग्ध मामला माना गया। आरोप है कि अनुसूचित जाति के छात्र को आरोपी प्रोफेसर एम. कोजोन राम ने कक्षा में अपमानित किया था और धमकाया था। आरोपी ने केरल हाईकोर्ट से जून में अग्रिम जमानत न मिलने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

प्रोफेसर के वकील का तर्क काम नहीं आया

प्रोफेसर के वकील ने तर्क दिया कि एससी-एसटी एक्ट लगाने से शिक्षकों में डर का माहौल बनेगा। हालांकि यह तर्क काम नहीं आया। वकील ने जब दलील दी कि प्रोफेसर को अपनी गलती का एहसास है, तो कोर्ट ने दो-टूक कहा कि ऐसे मामलों में सबक सीखने जैसा कुछ नहीं होता।