सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि ‘खेल के बीच में नियमों को नहीं बदला जा सकता है।’ शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में 2014-15 के प्रशिक्षक भर्ती मामले में पात्र उम्मीदवारों को नौकरी देने पर नए सिरे से विचार करने का आदेश देते हुए यह टिप्पणी की है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और एजी मसीह की पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि ‘जिस तरह से खेल के बीच में नियम नहीं बदले जा सकते, ठीक उसी तरह चयन समिति/एसओयूपी भर्ती प्रक्रिया के बीच में न तो नियम बदल सकती है और न ही कटऑफ अंक।’ पीठ ने साफ किया कि चयन समिति भर्ती प्रक्रिया के बीच में नियमों या कटऑफ बदलकर सैकड़ों प्रतिभागियों को नुकसान नहीं पहुंचा सकती है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में चयन समिति/एसओयूपी को पात्र उम्मीदवारों को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षक के खाली पदों पर भर्ती करने के लिए विचार करने और नियुक्ति करने का आदेश दिया है। पीठ ने सोसायटी के सदस्यों को दो सप्ताह के भीतर फैसले की प्रति लेकर सक्षम प्राधिकार के पास जाने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने 24 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल कई अपीलों को स्वीकार करते हुए यह फैसला दिया है।
उम्मीदवारो ं को नियुक्त करने पर विचार करें
कोर्ट ने कहा है कि ‘चूंकि राज्य की कार्रवाई मनमानीपूर्ण रही है, जिससे अपील करने वालों के चयन न होने समेत पूरी चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई है, इसलिए 2014 के नियमों की वैधता पर विचार किए बिना ही अपीलकर्ता को राहत देने के सवाल पर विचार करना हमारे लिए काफी है।’ पीठ ने चयन समिति को आदेश दिया कि पात्र उम्मीदवारो को नियुक्त करने पर विचार करे।’

