72 हजार शिक्षक भर्ती की सात श्रेणियों में होगी सुनवाई
प्रयागराज, सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से चले आ रहे परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती से जुड़े मामलों की सुनवाई अब अभ्यर्थियों को पांच मुख्य श्रेणियों में बांटकर की जाएगी। राज्य सरकार बनाम शिव कुमार पाठक मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने इस वर्गीकरण के आधार पर आगे की सुनवाई करने का महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कोर्ट ने मुख्य रूप से सात दिसंबर 2015 के अपने आदेश का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों को ध्यान में रखते हुए यह वर्गीकरण किया है।
इस मामले में न्यूनतम कटऑफ से अधिक अंक होने के बावजूद नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों की याचिकाएं शीर्ष अदालत के विचाराधीन हैं। तकरीबन 32 हजार अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट में दायर विभिन्न याचिकाओं से जुड़े हुए हैं। इस भर्ती में कोर्ट का रुख सकारात्मक है।
इसलिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी कतार में लग गए हैं।
पहली श्रेणी
उन व्यक्तियों की है जिन्हें मूल मुकदमे में प्रतिवादी बनाया गया था और उन्होंने सात दिसंबर 2015 को अदालत में हाजिरी दी थी।
दूसरी श्रेणी
उन उम्मीदवारों की है जिन्हें बाद में विभिन्न आवेदनों के जरिए पक्षकार बनाया गया था और वे उसी तारीख को कोर्ट में होने का दावा करते हैं।
तीसरी श्रेणी
उन अभ्यर्थियों की है जो न तो मूल पक्षकार, न ही पहले से शामिल किए गए थे, लेकिन 1100 लोगों के समूह का हिस्सा होने का दावा करते हैं।
चौथी श्रेणी
इसमें वे अभ्यर्थी शामिल हैं जिनका नाम जिलावार मेरिट सूची में था लेकिन नियुक्ति नहीं मिल सकी। साथ जिन्होंने काउंसिलिंग में हिस्सा लिया।
पांचवीं श्रेणी
24 फरवरी 2016 के आदेश का लाभ चाहने वालों की है। इसमें लगभग 68,000 आवेदक शामिल हैं जिन्हें राज्य सरकार द्वारा विचार करने के निर्देश दिए गए थे। 580 ऐसे उम्मीदवार भी हैं जिन्होंने 2016 में सरकार को पूरी जानकारी दी थी।
छठवीं श्रेणी
यह श्रेणी उन अभ्यर्थियों की है जो 30 नवंबर 2011 को जारी पुराने विज्ञापन की बजाय सात दिसंबर 2012 को दोबारा जारी विज्ञापन के आधार पर नियुक्ति चाहते हैं।
सातवीं श्रेणी
यह श्रेणी उन सभी उम्मीदवारों की है जो सापेक्ष मेरिट के आधार पर दावा करते हैं लेकिन ऊपर बताई गई किसी भी श्रेणी में नहीं आते हैं।

