15 August 2026

सात राज्यों में 1380 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, 12 लाख नौकरियां सृजित होने की उम्मीद

सात राज्यों में 1380 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, 12 लाख नौकरियां सृजित होने की उम्मीद

नई दिल्ली। देश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) के तेजी से विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक सात राज्यों ने वर्ष 2031 तक 1,380 GCC स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इन केंद्रों के स्थापित होने से करीब 12 लाख अतिरिक्त नौकरियां सृजित होने का अनुमान है।





इन सात राज्यों ने बनाई GCC नीति

CII की रिपोर्ट के अनुसार, GCC के लिए विशेष नीति घोषित करने वाले राज्यों में कर्नाटक, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, केरल, हरियाणा और मध्य प्रदेश शामिल हैं।

CII के चेयरमैन अश्मान मैगजीन के मुताबिक, राज्य सरकारों द्वारा GCC नीतियों को औपचारिक रूप देने की दिशा में दिखाई जा रही तेजी भारत के वाणिज्यिक रियल एस्टेट परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।

कर्नाटक का 500 GCC का लक्ष्य

रिपोर्ट के अनुसार कर्नाटक ने 500 GCC स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इससे करीब 3.5 लाख नौकरियां पैदा होने की संभावना है।

वहीं महाराष्ट्र में 200 GCC स्थापित होने से करीब चार लाख नई नौकरियों की संभावना जताई गई है।

राजस्थान में 1.5 लाख नौकरियों का अनुमान

राजस्थान भी 200 से अधिक GCC स्थापित करने की योजना बना रहा है। राज्य में इन केंद्रों के माध्यम से करीब 1.5 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है।

गुजरात और अन्य राज्यों के लक्ष्य

गुजरात ने 250 से अधिक GCC का लक्ष्य रखा है। इससे करीब 50,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

इसी तरह केरल में 80 GCC से 1.6 लाख नौकरियां, जबकि हरियाणा में 100 से अधिक GCC से करीब 30 हजार नौकरियां सृजित होने का अनुमान है।

मध्य प्रदेश ने भी 50 से अधिक GCC स्थापित करने और करीब 37,000 नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

IT और कॉर्पोरेट सेक्टर में बढ़ेंगे अवसर

GCC आमतौर पर बड़ी वैश्विक कंपनियों के टेक्नोलॉजी, रिसर्च, फाइनेंस, ऑपरेशंस और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के केंद्र के रूप में काम करते हैं। इन केंद्रों का विस्तार होने से IT के साथ-साथ मैनेजमेंट, फाइनेंस, इंजीनियरिंग और अन्य प्रोफेशनल क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

राज्यों की GCC नीतियों और निवेश योजनाओं के लागू होने के साथ आने वाले वर्षों में भारत के प्रमुख शहरों के अलावा नए शहरों में भी कॉर्पोरेट रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।