हाईस्कूल की 3 परीक्षाएं दीं, 3 जन्मतिथि, 7 साल बाद सहायक अध्यापक बर्खास्त
मऊ। फर्जी शैक्षिक अभिलेखों के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले एक सहायक अध्यापक के खिलाफ विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। दोहरीघाट ब्लॉक क्षेत्र के अपड़िया स्थित कंपोजिट विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापक संजय कुमार को बर्खास्त कर दिया गया है। जांच में उनके शैक्षिक अभिलेखों में अलग-अलग जन्मतिथियां दर्ज मिलने और हाईस्कूल की परीक्षा तीन बार देने का मामला सामने आया।
फर्जी अभिलेखों के आधार पर नौकरी का आरोप
मामला वर्ष 2018 में सामने आया, जब संजय कुमार ने सहायक अध्यापक पद पर नौकरी हासिल की। शिक्षिक अभिलेखों में हेराफेरी कर नौकरी पाने की शिकायत के बाद विभागीय जांच शुरू की गई।
बीईओ दोहरीघाट मुकेश कुमार ने 13 नवंबर 2025 को नोटिस जारी कर पंडित इंटर कॉलेज, दोहरीघाट के प्रधानाचार्य से संबंधित शैक्षिक एवं विद्यालयीय अभिलेखों का विवरण मांगा था।
रिकॉर्ड में मिली अलग-अलग जन्मतिथियां
जांच के दौरान सामने आया कि वर्ष 1998 के विद्यालयीय अभिलेख में संजय कुमार की जन्मतिथि फरवरी 1984 दर्ज थी, जबकि वर्ष 1999 की पंजिका में जन्मतिथि एक जुलाई 1984 अंकित थी।
इसके बाद हाईस्कूल परीक्षा से संबंधित अभिलेखों की जांच में भी जन्मतिथि अलग-अलग पाई गई।
तीन बार दी हाईस्कूल की परीक्षा
जांच रिपोर्ट के अनुसार संजय कुमार ने 1998, 1999 और 2003 में हाईस्कूल की परीक्षा दी थी। वर्ष 1998 और 1999 में वह परीक्षा में अनुतीर्ण भी हुए थे।
एक ही व्यक्ति द्वारा अलग-अलग वर्षों में हाईस्कूल परीक्षा देने और शैक्षिक अभिलेखों में जन्मतिथि अलग-अलग पाए जाने के बाद विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया।
विभागीय जांच के बाद बर्खास्तगी
बीईओ की जांच रिपोर्ट और शिक्षक के स्पष्टीकरण के आधार पर कार्रवाई की गई। रिपोर्ट में शैक्षिक अभिलेखों में हेराफेरी कर नौकरी हासिल करने की बात सामने आने के बाद सहायक अध्यापक संजय कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
साथ ही प्राथमिक विद्यालय में दर्ज कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
बीएसए संतोष कुमार उपाध्याय ने बताया कि कूटरचित अभिलेखों के आधार पर नौकरी हासिल करने के मामले में सहायक अध्यापक संजय कुमार को बर्खास्त किया गया है और संबंधित बीईओ को प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
7 साल बाद हुई बड़ी कार्रवाई
वर्ष 2018 में नौकरी पाने के करीब सात साल बाद शिक्षक के अभिलेखों में सामने आई विसंगतियों के आधार पर बर्खास्तगी की कार्रवाई हुई है। अब मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद फर्जी अभिलेख तैयार करने और नौकरी हासिल करने से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच हो सकती है।

