देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अग्निवीरों के परिजनों को नियमित सैनिकों की भांति कुछ सुविधाएं देने की संसदीय समिति की सिफारिश पर रक्षा मंत्रालय गंभीरता से विचार कर रहा है।
मौजूदा समय में अग्निवीरों के संघर्ष और ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर उन्हें सिर्फ बीमा राशि मिलती है। दो अलग-अलग योजनाओं के तहत यह राशि एक करोड़ रुपये होती है। हाल में रक्षा मंत्रालय से संबंधित संसद की स्थायी समिति ने इस मुद्दे पर अपनी सिफारिशों में कहा था कि जो अग्निवीर देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर करते हैं, उनके परिवार के लिए भी कुछ किया जाना चाहिए। समिति ने कहा कि ऐसे मामलों में अग्निवीरों के परिजनों को भी नियमित सैनिकों की भांति कुछ सुविधाएं देने पर सरकार विचार करे।
संसदीय समिति ने की थी सिफारिश : युद्ध में यदि नियमित सैनिक शहीद होते हैं या ड्यूटी के दौरान मृत्यु होती है तो उनके परिजनों को पेंशन मिलती है। घर के एक सदस्य को नौकरी भी दी जाती है। समिति का मानना है कि इनमें से कोई सुविधा अग्निवीर के परिजनों को मिलनी चाहिए, जिससे उनके परिवार का गुजर-बसर चल सके। सूत्रों का कहना है कि समिति की सिफारिश को लेकर सरकार गंभीर है और आने वाले समय में अग्निवीरों के परिजनों को किसी एक सुविधा का लाभ दिया जा सकता है।
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सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभ, शहीद का दर्जा नहीं मिलता
अग्निपथ योजना के लिए सेनाओं में अग्निवीरों की चार साल के लिए भर्ती होती है। उनको सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभ नहीं मिलते। इसके अलावा युद्ध में मारे गए अग्निवीरों को शहीद सैनिक का दर्जा और उससे जुड़े लाभ भी नहीं मिलते हैं। सिर्फ बीमा की राशि देने का प्रावधान है। इस योजना को चार साल पूरे होने वाले हैं और तीनों सेनाओं में करीब डेढ़ लाख अग्निवीर अभी कार्य कर रहे हैं। थल सेना में करीब 1.25 लाख अग्निवीर तैनात हैं। तीनों सेनाओं में हर साल 45-50 हजार अग्निवीरों की भर्ती होती है। अब तक करीब दो दर्जन अग्निवीर ड्यूटी के दौरान मारे गए हैं।

