22 September 2026

प्रशिक्षण सिर्फ शिक्षकों के हस्ताक्षर में सिमटा, 17 ब्लॉकों में कुछ घंटों में निपटा दिया गया पूरा प्रशिक्षण

 

प्रशिक्षण सिर्फ शिक्षकों के हस्ताक्षर में सिमटा, 17 ब्लॉकों में कुछ घंटों में निपटा दिया गया पूरा प्रशिक्षण

उन्नाव। शिक्षकों की क्षमता विकसित करने और विद्यालयों को निपुण लक्ष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से आयोजित शिक्षक संकुल प्रशिक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जिले के 17 ब्लॉकों में शिक्षक संकुलों का पूरे दिन का प्रशिक्षण कुछ ही घंटों में समाप्त कर दिया गया। आरोप है कि निर्धारित समय-सारिणी और प्रशिक्षण की मूल भावना का पालन करने के बजाय केवल औपचारिकता पूरी की गई।

शासनादेश के अनुसार तय था प्रशिक्षण का कार्यक्रम

रिपोर्ट के मुताबिक शिक्षक संकुल जनपदीय कार्यशाला का कार्यक्रम शासन के निर्देशों के अनुसार निर्धारित था। इसमें सुबह 9:00 से 9:30 बजे तक जनपद स्तर की टीम द्वारा प्रतिभागियों का पंजीकरण, इसके बाद 9:30 से 9:45 बजे तक स्टेट रिसोर्स ग्रुप (SRG) के मोटिवेशनल वीडियो, फिर 9:45 से 10:15 बजे तक निपुण मिशन के तहत शैक्षिक सत्र और 10:15 से 10:30 बजे तक उच्चाधिकारियों के प्रेरक सत्र का प्रावधान बताया गया।

इसके बाद एसआरजी, उत्कृष्ट शिक्षक संकुल, जिला समन्वयक गुणवत्ता, जिला समन्वयक एमआईएस और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण तथा दोपहर बाद डायट प्राचार्य द्वारा प्रशिक्षण दिया जाना निर्धारित था।

केवल हस्ताक्षर तक सीमित रहने का आरोप

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कई स्थानों पर प्रशिक्षण निर्धारित अवधि तक संचालित नहीं हुआ। कुछ शिक्षक संकुलों में शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज कराने के बाद प्रशिक्षण को कुछ घंटों में ही समाप्त कर दिया गया।

एक शिक्षक संकुल बैठक में 874 शिक्षक संकुलों के सापेक्ष 567 की उपस्थिति दर्ज होने का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ ब्लॉकों में आए शिक्षक संकुलों को भी अलग-अलग समूहों में बांटकर कम समय में प्रशिक्षण पूरा कराया गया।

बजट खर्च पर भी उठे सवाल

प्रशिक्षण के लिए शासन स्तर से बजट निर्धारित होने के बावजूद यदि प्रशिक्षण केवल औपचारिकता तक सीमित रहा, तो प्रशिक्षण की गुणवत्ता और बजट के उपयोग को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि एक शिफ्ट में करीब दो सौ से अधिक शिक्षकों के हस्ताक्षर लिए गए और प्रशिक्षण लेने के लिए आए शिक्षकों को जिले स्तर पर बनाए गए नियमों का पालन करने के लिए हस्ताक्षर कर रवाना कर दिया गया।

अधिकारियों ने बताई अलग व्यवस्था

रिपोर्ट में डायट उप प्राचार्य/जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से यह तर्क भी सामने आया है कि पूरे दिन प्रशिक्षण कराना अनिवार्य नहीं था और आवश्यकता के अनुसार कुछ घंटों का समय निर्धारित किया गया था। वहीं, रिपोर्ट में शासन द्वारा तय कार्यक्रम और वास्तविक प्रशिक्षण अवधि के बीच अंतर को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

निपुण लक्ष्य पर असर को लेकर चिंता

शिक्षक प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल उपस्थिति दर्ज कराना नहीं, बल्कि शिक्षकों को निपुण भारत मिशन, शैक्षिक गतिविधियों और विद्यालय स्तर पर प्रभावी शिक्षण के लिए तैयार करना है। यदि निर्धारित विषयों पर पर्याप्त समय दिए बिना प्रशिक्षण समाप्त किया जाता है, तो प्रशिक्षण के वास्तविक उद्देश्य पर असर पड़ सकता है।