लखनऊ। दो वर्ष से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने में तहसीलें मनमानी पर उतारू हो गयी हैं। केन्द्र सरकार के एक गजट का हवाला देकर पिछले लगभग एक माह से आवेदन ही वापस कर दिए जा रहे हैं, जबकि गजट में साफ लिखा है कि नियमावली उस तारीख से लागू होगी, जब केन्द्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना के माध्यम से तिथि तय करेगी।
यह स्थिति राजधानी लखनऊ के साथ पूरे प्रदेश की है। दो वर्ष से ज्यादा समय हो चुके जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वाले भटक रहे हैं। एक वर्ष से अधिक समय वाले जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने का अधिकार तहसीलों के उपजिलाधिकारियों को दिया गया है। लेकिन तहसीलें पिछले 26 अगस्त से जो भी आवेदन पहुंच रहे हैं उनको बिना जांच-पड़ताल ही वापस कर दे रही हैं। अकेले लखनऊ में 12 हजार से अधिक आवेदन तहसीलों से वापस हो चुके हैं। हालांकि नई व्यवस्था लागू होने की तारीख एक अक्टूबर तय हो गयी है।
गजट में स्पष्टता न होने से भ्रम की स्थिति रही। एक वर्ष से अधिक समय के जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के सभी आवेदन वाले निस्तारित किया जाएगा। सभी एसडीएम को निर्देश देंगे। एक अक्तूबर से नयी व्यवस्था लागू होनी है। दो वर्ष से अधिक समय वाले आवेदनों पर जिला कोर्ट से निस्तारण होगा।-विशाख जी, जिलाधिकारी
बच्चों का प्रवेश लटका, स्कूल मांग रहे नगर निगम से जारी जन्म प्रमाण पत्र
तहसीलों की इस मानमानी से कई बच्चों का स्कूलों में प्रवेश लटक गया है। वह नगर निगम से जारी जन्म प्रमाण पत्र मांग रहे हैं, लेकिन उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। उधर कई ऐसे वारिस हैं जिनकों बैंकों या अन्य जरूरी कागजत बनवाने में दिवंगत प्रियजन का मृत्यु प्रमाण पत्र बनना है। वह चक्कर लगा रहे हैं। अकेले सदर तहसील में हर दिन लगभग 200 आवदेन पहुंच रहे हैं। यहां से अब तक लगभग 8 हजार आवेदन वापस हो चुके हैं। यहां के एसडीएम साहिल कुमार ने कहा कि अब नयी व्यवस्था के तहत दो वर्ष से अधिक पुराने मामले कोर्ट से ही निस्तारित होगा, इसीलिए नहीं बन रहे हैं। यही हाल मलिहाबाद, बीकेटी व सरोजनीनगर का है।
अभिभावकों के सामने विकट समस्या
केन्द्र सरकार ने गजट के माध्यम से एक अधिसूचना जारी की है, जिसमें कहा गया है कि एक से दो वर्ष की देरी पर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की जरूरत होगी। दो वर्ष से अधिक देरी पर इसके लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के अदालती आदेश की आवश्यकता होगी। यह नए प्रावधान तभी लागू होगा जब केन्द्र इसकी तिथि की घोषण गजट के माध्यम से करेगी। आधी-अधूरी जानकारी को आधार बनाकर प्रमाण पत्र बनाना बंद किए जाने से लोगों के सामने विकट समस्या खड़ी हो गयी है। नगर निगम व जिला पंचायत अधिकार समाप्त होने की बात कहकर आवेदकों को तहसील भेज रहे हैं। तहसील के अधिकारी कोर्ट में जाने को कह रहे हैं, जबकि अभी कोर्ट तय ही नहीं है। ऐसे में वह असहाय नजर आ रहे हैं।
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