शिक्षा-मित्र प्रकरण ~
सबसे पहले स्थिति को साफ़ किया जाये तो राज्य सरकार बनाम आनंद कुमार यादव के निर्णय में इन्हें शिक्षक के समांतर नहीं माना गया (कारण केवल आरटीई ही नहीं इनकी नियुक्ति और इनके प्रशिक्षण समेत कई कारण रहे) , पूर्व में जाएँ तो इनकी नियुक्ति संविदा पर सार्वभौमिक शिक्षा और छात्र शिक्षक अनुपात को सही करने हेतु राज्य सरकार द्वारा 26/05/1999 मानदेय पर हुई थी जिसमें राज्य सरकार द्वारा इन्हें मानदेय दिया जाता था फिर वर्ष 2005 में ये सर्व शिक्षा अभियान के तहत रहे और इनको मानदेय उसी प्रक्रिया से मिला , कुल मिलाकर इनकी समस्त कार्य योजना सरकार द्वारा तय की जाती रही परंतु हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आरटीई के अनुसार स्थायी करने की प्रक्रिया पर जोर दिया गया क्योंकि अधिनियम का सम्बंध बच्चों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा है जिसमें दो मामले जैसे CWSN और अनुदेशक का रहा । हालांकि शिक्षा मित्रों का पद आरटीई में नहीं है फिर भी धरातल पर तो सरकार , आप और हम जानते ही हैं ये क्या करते हैं ।
इसके बाद वर्ष 2018-19 में समग्र शिक्षा अभियान आया जिसमें EC educators को निविदा पर की जा रही है यानी outsourcing जिसमें सरकार का मतलब EC educators से नहीं है , समग्र शिक्षा और NEP के अनुसार PPP model के अनुसार ये निविदा पर रखे गए हैं और भविष्य में स्थाई करने की माँग नहीं कर सकते हैं ।
आज की बात करें तो जब से अंजुमन निशात-ए-आलम का निर्णय आया है तो उससे ये स्थिति साफ़ होती है कि शिक्षक को भी टीईटी देना अनिवार्य होगा लेकिन जैसा आनंद यादव के निर्णय में साफ़ किया था कि ये शिक्षक नहीं हैं तो फिर ?
इसी चीज़ को लेकर SSA 2005 के अनुसार जम्मू कश्मीर में शिक्षा मित्र रखे जाते थे जिनको स्थाई करने के लिए वहाँ की सरकार ने अनुच्छेद 370 के हटने से पहले शासनादेश जारी किया लेकिन केंद्र सरकार ने साफ़ कहाँ कि अब यहाँ केंद्र के नियम लागू होंगे और आरटीई प्रभावी है इसलिए इन्हें नियमों से छूट नहीं दी जा सकती है जिस पर माननीय न्यायाधीश माहेश्वरी जी की बेंच ने केंद्र के नियमों और अंजुमन वाले निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि इनका मानदेय मानवता अनुसार कीजिए और जो भी तीन साल में टीईटी उत्तीर्ण कर लें उन्हें स्थाई किया जाए ।
इसी बात को लेकर एक दिन में लाइव में कहा था कि ऐसे शिक्षा मित्र जो टेट उत्तीर्ण है वे प्रयास करें लेकिन अब हठधर्मिता देखिए कि नियमों से ऊपर जाकर विशेष टेट का आयोजन किया जा रहा है जो कि केंद्र (एनसीटीई) के मानकों के अनुरूप नहीं है यद्यपि इसमें प्रयास किया तो सफलता के अधिक चांस हैं लेकिन नेतागीरी के आधार पर और न्यायिक प्रणाली को देखते हैं तो मन दुखी होता है ।
शिक्षा मित्रों की संविदा सरकार के payroll पर है अगर नियमों को पूरा करते हैं तो माननीय न्यायालय को अवश्य इनका साथ देना चाहिए जबकि EC educators निविदा पर हैं तो उनका भविष्य में कोई अधिकार नहीं रहेगा और नियुक्ति तो है भी ऐसी कि चले तो चांद तक वरना शाम तक क्योंकि outsourcing companies का कोई भरोसा तो है नहीं ।
#rana

