24 September 2026

मिड-डे मील पर महंगाई की मार: दाल के दाम बढ़े, शिक्षकों की जिम्मेदारियां बढ़ने से बढ़ी चिंता

 

मिड-डे मील पर महंगाई की मार: दाल के दाम बढ़े, शिक्षकों की जिम्मेदारियां बढ़ने से बढ़ी चिंता

लखनऊ। महंगाई का असर अब सरकारी स्कूलों में मिलने वाले मिड-डे मील (PM POSHAN) की व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। बाजार में दालों के दाम लगातार बढ़ने से विद्यालयों में बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की चुनौती बढ़ रही है। ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बीच मिड-डे मील की व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी पहले से ही अतिरिक्त प्रशासनिक कार्यों के दबाव के बीच काम कर रहे शिक्षकों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।


हाल ही में प्रकाशित बाजार भाव के अनुसार लखनऊ के फुटकर बाजार में अरहर दाल करीब ₹135-145 प्रति किलो, उड़द दाल ₹150-160, मूंग दाल ₹130 और चना दाल ₹90-95 प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं मसूर दाल भी करीब ₹95-100 प्रति किलो बताई गई है।


दाल महंगी, तो मिड-डे मील का बजट कैसे चले?

मिड-डे मील में दाल महत्वपूर्ण खाद्य सामग्री है। कीमतों में वृद्धि का सीधा असर भोजन की लागत पर पड़ता है। ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि बच्चों को निर्धारित मात्रा और गुणवत्ता के अनुसार भोजन उपलब्ध कराना प्राथमिकता है, लेकिन महंगाई के दौर में उपलब्ध बजट और वास्तविक बाजार भाव के बीच अंतर पर भी विभाग को ध्यान देना चाहिए।

शिक्षकों पर पहले से कई जिम्मेदारियां

सरकारी विद्यालयों में शिक्षक केवल शिक्षण कार्य तक सीमित नहीं हैं। उन्हें मिड-डे मील की व्यवस्था, पोर्टल कार्य, छात्र उपस्थिति, विभिन्न ऑनलाइन रिपोर्ट, विभागीय सूचनाएं और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। ऐसे में खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमतें मिड-डे मील व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त दबाव पैदा कर सकती हैं।

शिक्षकों का कहना है कि महंगाई बढ़ने के साथ-साथ मिड-डे मील के लिए मिलने वाली धनराशि की समय-समय पर समीक्षा और वास्तविक बाजार दरों के अनुरूप समायोजन किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों के भोजन की गुणवत्ता प्रभावित न हो और विद्यालय स्तर पर अनावश्यक दबाव न बने।

सरकार से शिक्षकों की मांग

शिक्षक संगठनों की ओर से मांग उठाई जा सकती है कि मिड-डे मील की सामग्री के लिए मिलने वाली धनराशि को मौजूदा बाजार भाव के अनुरूप अपडेट किया जाए। साथ ही विद्यालयों में भोजन व्यवस्था से जुड़े कार्यों में शिक्षकों की भूमिका को स्पष्ट और व्यवस्थित किया जाए, ताकि उनका मुख्य फोकस बच्चों की पढ़ाई और शैक्षणिक गुणवत्ता पर बना रहे।

महंगाई बढ़ रही है तो मिड-डे मील का बजट भी बाजार भाव के अनुरूप बढ़ना जरूरी है—ताकि न बच्चों की थाली छोटी हो और न शिक्षकों पर अतिरिक्त आर्थिक/प्रशासनिक दबाव बढ़े।