प्रयागराज: पुरानी नियमावली से TGT-PGT भर्ती की मांग को लेकर 19वें दिन खत्म हुआ आमरण-अनशन
प्रयागराज। सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पुरानी नियमावली और पुराने पाठ्यक्रम के आधार पर TGT-PGT भर्ती में अवसर देने की मांग को लेकर प्रयागराज के शिक्षा निदेशालय में पांच सितंबर से चल रहा प्रतियोगी छात्रों का आमरण-अनशन बुधवार को 19वें दिन समाप्त हो गया। अनशन समाप्त होने के बाद सभी
अनशनकारियों की मेडिकल जांच भी कराई गई।
बुधवार सुबह करीब 11:30 बजे जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा और पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया शिक्षा निदेशालय पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने अनशन कर रहे चार अभ्यर्थियों—बुलंदशहर के प्रवीण कुमार, आजमगढ़ के रोशन सरोज, शिमला पटेल और प्रतापगढ़ की मीना देवी—से अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया।
हालांकि, अभ्यर्थियों ने तत्काल अनशन तोड़ने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि जब तक आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आशुतोष पांडेय मौके पर आकर उन्हें जूस नहीं पिलाते, तब तक वे अनशन समाप्त नहीं करेंगे।
आशुतोष पांडेय के पहुंचने के बाद टूटा अनशन
इसके बाद आशुतोष पांडेय को फोन कर शिक्षा निदेशालय स्थित अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक कामता राम पाल के कार्यालय के बाहर पहुंचने के लिए कहा गया। कुछ देर बाद डीएम ने बातचीत के दौरान रोशन सरोज और प्रवीण कुमार को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया, लेकिन दोनों महिला अभ्यर्थी अपनी मांग पर कायम रहीं।
डीएम और पुलिस कमिश्नर के पहुंचने के करीब एक घंटे बाद आशुतोष पांडेय शिक्षा निदेशालय पहुंचे। इसके बाद उन्होंने सभी साथियों को जूस पिलाकर आमरण-अनशन समाप्त कराया।
प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से मिले आश्वासन के बाद अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
क्या हैं प्रतियोगी छात्रों की प्रमुख मांगें?
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
TGT-PGT समेत संबंधित शिक्षक भर्तियों में पुरानी नियमावली और पुराने पाठ्यक्रम के आधार पर प्रभावित अभ्यर्थियों को एक अवसर दिया जाए।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की संबंधित भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया अपनाकर ऐसा प्रावधान किया जाए, जिससे पुराने नियमों के तहत पात्र अभ्यर्थी अवसर से वंचित न हों।
एकल विषय, TET तथा स्नातक/परास्नातक में प्रतिशत जैसी अर्हताओं के कारण पुराने नियमों के तहत पात्र रहे अभ्यर्थियों को एकतरफा तरीके से भर्ती प्रक्रिया से बाहर न किया जाए।
पूर्व में लागू आरक्षण और विशेष प्रावधानों से जुड़े मामलों की विधिक एवं नियमसम्मत समीक्षा कर स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए, ताकि पात्र अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।
छात्रों ने कहा- आंदोलन खत्म नहीं, फिलहाल एक पड़ाव
अनशन समाप्त होने के बाद प्रतियोगी छात्रों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उनके अनुसार, अनशन समाप्त करना आंदोलन की दिशा में केवल एक पड़ाव है।
छात्रों का कहना है कि आंदोलन की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब शासन की ओर से आधिकारिक नोटिस या आदेश जारी कर TGT-PGT अभ्यर्थियों को पुरानी नियमावली के अनुसार एक अवसर देने की मांग पर स्पष्ट निर्णय लिया जाएगा।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आशुतोष पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद उम्मीद जगी है और अब शासन की ओर से औपचारिक आदेश जारी होने का इंतजार किया जाएगा। छात्रों ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वे आगे भी अपनी मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाते रहेंगे।
अफसरों और छात्रों के बीच 12 घंटे तक बना रहा गतिरोध
आंदोलनकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद मंगलवार को ही अनशन समाप्त किया जा सकता था, लेकिन आशुतोष पांडेय को मौके पर बुलाने की मांग को लेकर गतिरोध बना रहा।
अनशनकारियों की मांग थी कि वे आशुतोष पांडेय के हाथों जूस पीकर ही अनशन समाप्त करेंगे। मंगलवार देर रात डीएम और पुलिस कमिश्नर ने शिक्षा निदेशालय पहुंचकर अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया, लेकिन अभ्यर्थी अपनी मांग पर कायम रहे।
बुधवार को आशुतोष पांडेय को शिक्षा निदेशालय बुलाए जाने के बाद यह गतिरोध समाप्त हुआ और सभी अनशनकारियों ने जूस पीकर अनशन खत्म किया।
आंदोलन के चलते शिक्षा निदेशालय में पसरा रहा सन्नाटा
प्रतियोगी छात्रों के आंदोलन का असर शिक्षा निदेशालय के कामकाज पर भी दिखाई दिया। कई विभागों में ताले लगे रहे। पुलिस मुख्यालय की ओर स्थित शिक्षा निदेशालय का मुख्य द्वार पहले से बंद था, जबकि यूपी बोर्ड की ओर वाले गेट से आई-कार्ड देखकर अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रवेश दिया जा रहा था।
बुधवार सुबह करीब 10 बजे धरनास्थल पर गिने-चुने छात्र मौजूद थे, जबकि बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी परिसर में तैनात रहे। आंदोलनकारियों के आक्रोश को देखते हुए माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के कई अधिकारी कार्यालय नहीं पहुंचे।
पुलिस कमिश्नर ने सुनाई कछुआ-खरगोश की कहानी
डीएम मनीष कुमार वर्मा और पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने अनशनकारियों से काफी देर तक बातचीत की। इस दौरान पुलिस कमिश्नर ने कछुआ और खरगोश की दौड़ की कहानी भी सुनाई।
उन्होंने पहली दौड़ में कछुए की जीत, इसके बाद खरगोश और कछुए के बीच हुई अगली दौड़ के प्रसंग को रोचक ढंग से बताया। अंत में उन्होंने संदेश दिया कि यदि सभी लोग मिलकर एक साथ आगे बढ़ेंगे तो सफलता हासिल की जा सकती है।
फिलहाल प्रतियोगी छात्रों ने मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद अनशन समाप्त कर दिया है और अब उनकी नजर शासन के औपचारिक आदेश पर है।
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