24 September 2026

टीजीटी-पीजीटी भर्ती की मांग को लेकर सीएम के आश्वासन पर माने छात्र, अनशन खत्म

 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पुरानी नियमावली से टीजीटी-पीजीटी भर्ती की मांग को लेकर पांच सितंबर से चला आ रहा प्रतियोगी छात्रों का आमरण-अनशन बुधवार को 19वें दिन समाप्त हो गया। इसके बाद उनकी मेडिकल जांच भी कराई गई।



डीएम मनीष कुमार वर्मा और पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने बुधवार सुबह लगभग 11:30 बजे शिक्षा निदेशालय पहुंचकर अनशनकारी चारों अभ्यर्थियों बुलंदशहर के प्रवीण कुमार, आजमगढ़ के रोशन सरोज व शिमला पटेल और प्रतापगढ़ की मीना देवी से अनशन तोड़ने का अनुरोध किया। हालांकि अनशनकारियों ने यह कहते हुए इनकार किया कि जब तक उनका नेतृत्व कर रहे आशुतोष पांडेय आकर जूस नहीं पिलाते तब तक अनशन नहीं तोड़ेंगे।उसके बाद आशुतोष पांडेय को फोन करके शिक्षा निदेशालय में अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक कामता राम पाल के कार्यालय के बाहर पहुंचने को कहा गया। थोड़ी देर बाद डीएम ने बातचीत करते हुए रोशन सरोज और प्रवीण कुमार को तो जूस पिला दिया, लेकिन दोनों छात्राएं नहीं मानीं। डीएम-कमिश्नर के पहुंचने के एक घंटे बाद आशुतोष पांडेय पहुंचे तो सभी साथियों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। छात्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से मिले आश्वासन के बाद अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया है।


छात्रों की प्रमुख मांगें


● टीजीटी-पीजीटी सहित संबंधित शिक्षक भर्तियों में पुरानी नियमावली एवं पुराने पाठ्यक्रम के आधार पर प्रभावित अभ्यर्थियों को एक अवसर दिया जाए।


● उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से संचालित संबंधित भर्ती प्रक्रिया में आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया अपनाते हुए ऐसा प्रावधान किया जाए, जिससे पुराने नियमों के अंतर्गत पात्र रहे अभ्यर्थी अवसर से वंचित न हों।


● एकल विषय, टीईटी, स्नातक/परास्नातक में प्रतिशत जैसी अर्हताओं के कारण पुराने नियमों के तहत पात्र रहे किसी भी अभ्यर्थी को एकतरफा रूप से अवसर से बाहर न किया जाए।


● पूर्व में लागू आरक्षण/विशेष प्रावधानों से संबंधित मामलों की भी विधिक एवं नियमसम्मत समीक्षा कर स्पष्ट व्यवस्था की जाए, ताकि पात्र अभ्यर्थी अनावश्यक रूप से अवसर से वंचित न हों।


प्रतियोगियों के मुताबिक, पूरी तरह समाप्त नहीं हुई लड़ाई


प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि यह लड़ाई अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। यह संघर्ष की दिशा में केवल पड़ाव है। आंदोलन की वास्तविक सफलता उस दिन मानी जाएगी, जब शासन की ओर से आधिकारिक नोटिस/आदेश जारी होगा और टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों को पुरानी नियमावली के अनुसार एक अवसर देने की मांग को स्वीकार कर लिया जाएगा। छात्रों ने लंबे समय तक लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष किया है और आगे भी आवश्यकता पड़ने पर अपनी मांग के लिए आवाज उठाते रहेंगे। आशुतोष पांडेय ने कहा कि मुख्यमंत्री के आश्वासन से उम्मीद जगी है और अब वे शासन की ओर से औपचारिक आदेश जारी होने की प्रतीक्षा करेंगे।


अफसरों की जिद में 12 घंटे तक नहीं टूटा अनशन


छात्रों का अनशन अफसरों की जिद में 12 घंटे और टल गया। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद मंगलवार को ही अनशन समाप्त हो गया होता। अनशनकारियों की मांग थी कि आशुतोष पांडेय को मौके पर बुलाया जाए तो उन्हीं के हाथों जूस पीकर अनशन तोड़ेंगे, लेकिन शिक्षा निदेशालय पर ड्यूटी कर रहे पुलिस और प्रशासन के अफसरों ने उनकी बात नहीं मानी। मंगलवार देर रात डीएम और पुलिस कमिश्नर ने पहुंचकर अनशन तोड़ने का अनुरोश किया, लेकिन उसके बावजूद अनशनकारी नहीं माने। आखिरकार बुधवार को जब आशुतोष को शिक्षा निदेशालय बुलाया गया जब कहीं जाकर गतिरोध समाप्त हुआ।


विभागों में रहा ताला नदारद रहे अफसर


आंदोलन के कारण शिक्षा निदेशालय के कई विभागों में ताला लगा रहा। पुलिस मुख्यालय के सामने वाला शिक्षा निदेशालय का मुख्य द्वार तो पहले से ही बंद था। यूपी बोर्ड के सामने वाले गेट से बुधवार को आई-कार्ड देख अधिकारियों और कर्मचारियों को इंट्री दी जा रही थी। सुबह दस बजे के आसपास गिने-चुने छात्र धरने पर बैठे थे, जबकि दर्जनों पुलिसकर्मियों ने परिसर को घेर रखा था। आक्रोश देखते हुए माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग का कोई अधिकारी अपने कार्यालय नहीं पहुंचा।


डीएम और पुलिस कमिशनर ने अनशनकारियों से लंबी वार्ता की। पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने कछुआ और खरगोश की दौड़ की कहानी को रोचक तरीके से सुनाया। एक कहानी तो सबको पता है कि कैसे कछुआ जीत गया फिर दूसरी दौड़ में खरगोश और तीसरी में कछुआ के जीतने का किस्सा सुनाया और अंत में नसीहत दी कि सब मिलकर दौड़ेंगे तो सभी को सफलता मिलेगी।