कम छात्र संख्या पर पर्यवेक्षक की तैनाती की व्यवस्था समाप्त
प्रधानाध्यापकों की तैनाती सभी विद्यालयों में अनिवार्य
बेसिक शिक्षा परिषद के सभी स्कूलों में प्रधानाध्यापकों की तैनाती अनिवार्य रूप से करनी होगी। उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खंडपीठ ने 30 अप्रैल 2025 को बेसिक शिक्षा अधिकारियों को केवल वरिष्ठ सहायक अध्यापकों को ही प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में तैनात करने के आदेश दिए थे, ताकि कनिष्ठ अध्यापकों के प्रभारी बनने से होने वाली असंतोष की स्थिति समाप्त की जा सके। इसके साथ ही कई याचिकाओं में प्रभारी प्रधानाध्यापकों को नियमित के समान वेतन देने के आदेश भी दिए थे।
इन आदेशों के अनुपालन में शासन ने 14 अक्टूबर 2025 को शासनादेश जारी किया था। इसमें 150 से कम बच्चों वाले प्राथमिक और 100 से कम बच्चों वाले उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वरिष्ठतम अध्यापक को केवल पर्यवेक्षक बनाने तथा उन्हें अतिरिक्त भुगतान न देने का प्रावधान था। साथ ही 150 से अधिक छात्र संख्या वाले उच्च प्राथमिक और 100 से अधिक बच्चों वाले प्राथमिक विद्यालयों में जिला वरिष्ठता सूची से प्रभारी प्रधानाध्यापक की तैनाती की व्यवस्था दी गई थी।
हालांकि 16 जुलाई को जारी संशोधित शासनादेश में पर्यवेक्षकों की तैनाती का प्रावधान समाप्त हो गया है। लिहाजा अब सभी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में जहां स्थायी प्रधानाध्यापक नहीं हैं, वहां जिला स्तरीय वरिष्ठता सूची से प्रभारी प्रधानाध्यापक/प्रधानाध्यापिका तैनात किए जाएंगे।
प्रमुख बिंदु:
- प्रभारी प्रधानाध्यापकों को नियमित के समान वेतन: न्यायालय ने कई याचिकाओं की सुनवाई के बाद प्रभारी प्रधानाध्यापकों को नियमित पद के समान वेतन देने का निर्देश दिया है।
- जिला स्तरीय वरिष्ठता सूची से तैनाती: कनिष्ठ अध्यापकों को कमान सौंपने से उपजे असंतोष को खत्म करने के लिए जिला वरिष्ठता सूची के आधार पर ही प्रभारी बनाए जाएंगे।
- पर्यवेक्षक व्यवस्था खत्म: संशोधित शासनादेश के तहत कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में पर्यवेक्षक बनाने की पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

