इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के तहत परिवार के मुखिया या कमाने वाले सदस्य की दुर्घटना में मृत्यु होने पर उसकी अविवाहित बहन को केवल इस आधार पर बीमा राशि देने से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह योजना में बीमित परिवार के सदस्यों की सूची में शामिल नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि मृतक के कानूनी वारिस को बीमा राशि देने का प्रावधान अलग है। कोर्ट ने बीमा कंपनी को याची को पांच लाख रुपये चार सप्ताह के भीतर देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसादकी खंडपीठ ने यह आदेश बस्ती की विद्याावती की याचिका पर दिया। कोर्ट ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की ओर से 16 अप्रैल 2021 को बीमा दावा खारिज करने संबंधी आदेश रद्द कर दिया।

