● यूपी के सीईओ के एक्स हैंडल से दिया गया जवाब
● भारत निर्वाचन आयोग ने संयम बरतने के दिए निर्देश
● आम आदमी पार्टी, कांग्रेस ने मतदाता सूची में गड़बड़ नामों पर उठाए सवाल
लखनऊ। यूपी में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के आधिकारिक एक्स हैंडल से हुई धार्मिक टिप्पणी पर सियासी बवाल मच गया है। कांग्रेस पार्टी ने ऐसी टिप्पणी पर सवाल उठाया तो आयोग ने भाषा की मर्यादा व संयम बरतने के भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश याद दिलाते हुए मामले के पटाक्षेप का प्रयास किया।
आम आदमी पार्टी के यूपी प्रभारी संजय सिंह ने एक्स पर सवाल उठाया कि आखिर राम ने यादव को ही क्यों मारा? उसने किसी सिंह, पाठक, अस्थाना, शर्मा, राय व बिष्ट को क्यों नहीं मारा। आपका कंप्यूटर घोर जातिवादी है क्या आप किसी पार्टी का एजेंडा चला रहे हैं। इस पर सीईओ नवदीप रिणवा के एक्स हैंडल से सफाई देते हुए कहा गया कि राम ने शर्मा को भी मारा। कंप्यूटर व सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं है। गलती को हमने स्वीकार किया और भगवान का शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा, नहीं तो जातिवादी होने के साथ ही सांप्रदायिक होने का इल्जाम भी लगता। सीईओ के एक्स हैंडल से दिए गए इस जवाब पर कांग्रेस की सोशल मीडिया इंचार्ज सुप्रिया श्रीनेत ने सीईओ यूपी से सवाल करते हुए पोस्ट किया कि इस हैंडल को कौन चला रहा है। वैसे भी कोई खास विश्वसनीयता आप लोगों में बची नहीं है।
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मामले के सियासी रंग लेने पर फिर दी सफाई
मामले के सियासी रंग लेने व आरोप -प्रत्यारोप के बीच फिर सीईओ यूपी के एक्स हैंडल से पोस्ट किया गया कि प्रत्येक मामले में संयत भाषा का प्रयोग करते हुए बिना अनावश्यक टिप्पणी के केवल तथ्यों तक ही अपनी बात सीमित रखने के निर्देश भारत निर्वाचन आयोग की ओर से दिए गए हैं। इसके बाद आम आदमी पार्टी के यूपी प्रभारी संजय सिंह ने लखनऊ में एक प्रेस कांफ्रेन्स कर उन्होंने कहा है कि वोटर लिस्ट में बार-बार गड़बड़ी उजागर होने के बावजूद चुनाव आयोग जवाबदेही तय करने के बजाय शर्मनाक कुतर्क दे रहा है। उन्होंने कहा कि सीईओ ने जो कहा, वह घोर आपत्तिजनक और सांप्रदायिक मानसिकता का प्रतीक है।

