UP News: 22 कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का आरोप, बाबू के खिलाफ FIR दर्ज
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राज्यकर विभाग में कर्मचारियों के सर्विस रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। गाजियाबाद इकाई में मानव संपदा पोर्टल पर 22 कर्मचारियों की वार्षिक प्रविष्टियों में कथित अनियमितताओं के मामले में तृतीय श्रेणी कर्मचारी रामशंकर यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। मामले में अधिकारियों की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
मानव संपदा पोर्टल पर कैसे सामने आया मामला?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 की वार्षिक प्रविष्टियों से संबंधित रिकॉर्ड में कथित तौर पर अलग-अलग तारीखों पर आईडी के माध्यम से बदलाव किए गए। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों की प्रविष्टियां अंतिम रूप से दर्ज किए जाने के कारण उनके सर्विस रिकॉर्ड प्रभावित हुए।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में 23 अक्टूबर को गाजियाबाद के कविनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। इससे पहले 2 सितंबर को मामले का खुलासा किया गया था।
जांच के लिए गठित हुई तीन सदस्यीय समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त अजय कुमार गौतम ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति में अपर आयुक्त ग्रेड-2 (विभागीय अनुशासनात्मक अधिकारी) मोहन त्रिपाठी, संयुक्त आयुक्त प्रेम शंकर राय और पूनम सिंह को शामिल किए जाने की जानकारी दी गई है।
समिति ने अपनी जांच में रामशंकर यादव को दोषी माना। हालांकि, मामले से जुड़े सभी तथ्यों और जिम्मेदारियों का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच एवं कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगा।
अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल
स्टाफ एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री विपिन चौधरी ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि कर्मचारियों के रिकॉर्ड में बदलाव करने के लिए आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल हुआ, तो यह भी जांच का विषय है कि संबंधित लॉगिन की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी।
मामले में यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या किसी कर्मचारी की आईडी का अनधिकृत इस्तेमाल हुआ या पासवर्ड रीसेट करने की प्रक्रिया में कोई चूक हुई।
लॉग-इन रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जरूरी
रिपोर्ट के अनुसार, एनआईसी से प्राप्त लॉग-इन और लॉग-आउट रिकॉर्ड, मैक एड्रेस, डिवाइस, डीएचसीपी सर्वर लॉग, रेडियस लॉग और भौगोलिक लोकेशन जैसे डिजिटल साक्ष्यों की जांच की गई।
इन तकनीकी रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संबंधित आईडी का इस्तेमाल किस समय और किस डिवाइस से किया गया था। मामले में डिजिटल सुरक्षा और विभागीय निगरानी व्यवस्था की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आगे क्या होगा?
अब मामले में एफआईआर के आधार पर पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। जांच में कथित छेड़छाड़ की परिस्थितियों, इस्तेमाल की गई आईडी और पासवर्ड तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।
महत्वपूर्ण: यह मामला कथित अनियमितताओं और जांच से जुड़ा है। किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

