बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए जनगणना ड्यूटी से शिक्षकों को मुक्त रखने की मांग, राजकीय शिक्षक संघ ने लिखा पत्र
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों को देखते हुए राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी से मुक्त रखने की मांग उठाई गई है। राजकीय शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेश ने इस संबंध में शासन से आग्रह किया है कि शिक्षकों को परीक्षा एवं शैक्षणिक कार्यों को प्राथमिकता देने का अवसर दिया जाए।
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मुख्य सचिव को भेजा गया पत्र
समाचार रिपोर्ट के अनुसार, राजकीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश के संरक्षक रमेश्वर पांडेय ने मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेजकर शिक्षकों को जनगणना कार्य से अलग रखने की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि फरवरी 2027 से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। ऐसे में नवंबर और दिसंबर के महीने पाठ्यक्रम पूरा कराने तथा विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए तैयार करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
फरवरी में बोर्ड परीक्षाएं, शिक्षकों पर बढ़ेगा कार्यभार
शिक्षकों के सामने बोर्ड परीक्षा की तैयारी के साथ पाठ्यक्रम पूरा कराने और प्रायोगिक परीक्षाओं की जिम्मेदारी भी रहेगी। फरवरी में लिखित परीक्षाएं प्रस्तावित होने के कारण विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित करना जरूरी बताया गया है।
करीब 150 राजकीय इंटर कॉलेज प्रवक्ता विहीन
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रदेश के सभी जनपदों में राजकीय एवं माध्यमिक विद्यालयों के अधिकांश शिक्षक जनगणना ड्यूटी में लगाए गए हैं। लगभग 150 राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रवक्ता नहीं होने की बात भी कही गई है।
ऐसी स्थिति में शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाने से विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
अन्य कर्मचारियों से जनगणना कार्य कराने का सुझाव
राजकीय शिक्षक संघ ने सुझाव दिया है कि जनगणना कार्य में अन्य विभागों के कर्मचारियों की सेवाएं ली जा सकती हैं। इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर निजी एजेंसियों के माध्यम से भी कार्य कराया जा सकता है।
संघ का कहना है कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों और बोर्ड परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी से अलग रखने पर विचार किया जाना चाहिए।
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