लॉकडाउन में बच्चे गणित की गुत्थियां भूले, ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों की गणित कमजोर हुई

कोविड और लॉकडाउन में ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प सामने आया। इसके जितने फायदे हुए उतने ही नुकसान भी। कुछ विषय ऐसे हैं जिनमें शिक्षक का बच्चों के सामने होना जरूरी होता है। गणित भी ऐसा ही विषय है। कई सवाल ऐसे हैं जो ऑनलाइन नहीं समझाए जा सकते। नतीजा यह रहा कि गणित में बच्चे कमजोर हो गए। यह आकलन है एनडीईए का।


एनडीईए अमेरिकी संस्था है जो शिक्षा में शोध करती है। इस संस्था ने रिसर्च में बताया कि बच्चे गणित में कमजोर हो गए। शहर के शिक्षकों का भी मानना है कि कक्षा तीन से 12 तक के सर्वोच्च अंक वाले छात्र भी पीछे हो गए।

टर्म परीक्षा में छात्र पीछे

ऑफलाइन परीक्षाओं में बच्चों के अंक पहले की तुलना में कम हैं। ये दशा सरकारी और प्राइवेट के साथ ही यूपी, सीबीएसई और सीआईएससीई तीनों बोर्ड में हैं। राजकीय स्कूल के गणित प्रवक्ता ने कहा कि अब तो सुधार दिख रहा है लेकिन ऑनलाइन कक्षा के बाद टर्म परीक्षाओं में गणित के अंकों में पांच से दस फीसद की कमी आई।

अब अभ्यास पर जोर

राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य धीरेन्द्र मिश्रा ने कहा कि अभ्यास का समय बढ़ाया है। अमीनाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य एसएल मिश्रा ने कहा कि शिक्षकों को अभ्यास के निर्देश दिए गए हैं।

ऑनलाइन कक्षाओं में सभी बच्चों को एक स्क्रीन पर देख पाना मुश्किल होता है। एकाग्रता भी टूटती है। नीरज द्विवेदी, ब्राइटलैण्ड इंटर कॉलेज,

ऑनलाइन कक्षाओं से बच्चों की अभ्यास करने की आदत खत्म हो गई है। गणित में अभ्यास सबसे ज्यादा जरूरी है। अम्बरीश अवस्थी, अमीनाबाद इंटर कॉलेज

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