जनगणना के सवालों का जवाब देने के लिए हर भारतीय बाध्य

केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि प्रत्येक भारतीय नागरिक जनगणना के सवालों का जवाब देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। जनगणना और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर की प्रक्रिया को सुचारु ढंग से चलाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।


केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि राज्य सरकारें जनगणना अधिनियम, 1948 के प्रविधानों के तहत जनगणना कार्य में सहायता या निगरानी के लिए जनगणना अधिकारियों की नियुक्ति करती हैं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति कानूनी तौर पर इस बात के लिए बाध्य है कि वह जनसंख्या के सवालों का अपनी जानकारी के हिसाब से जवाब दे।

बताते चलें कि पूरे देश में जनगणना के तहत आवास की सूची बनाने का काम एक अप्रैल से 30 सितंबर, 2020 तक किया जाना था। लेकिन, कोविड महामारी के प्रकोप के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। जनगणना का काम इस समय स्थगित है और सरकार ने नए कार्यक्रम की घोषणा नहीं की है। पहले के कार्यक्रम के अनुसार, जनगणना के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च, 2021 थी। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए यह तिथि एक अक्टूबर, 2020 थी।

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