एनपीएस निजी क्षेत्र को भी ज्यादा टैक्स छूट संभव,पेंशन नियामक पीएफआरडीए ने कर रियायत देने पर वित्त मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा


पेंशन फंड नियामक पीएफआरडी ने नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) को निजी क्षेत्र के लिए भी बेहतर बनाने के कवायद तेज कर दी है।

नियामक ने वित्त मंत्रालय को भेजे अपने प्रस्ताव में कहा है कि निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को भी सरकारी कर्मचारियों की तरह एनपीएस में 24 फीसदी तक अंशदान पर आयकर छूट दी जाए। मौजूदा समय में सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को ही 24 फीसदी की टैक्स छूट दी जाती है। मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि वित्त मंत्रालय पीएफआरडीए के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है और अगले बजट में इसका ऐलान हो सकता है। मौजूदा समय में निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को एनपीएस में महज 20 फीसदी तक अंशदान पर ही टैक्स छूट मिलती है।

एनपीएस के तहत कर्मचारी के मूल वेतन और महंगाई भत्ता से 10 फीसदी राशि काटी जाती है, जबकि नियोक्ता इसमें 14 फीसदी का अंशदान करता है। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2019-20 से केंद्रीय कर्मचारियों के एनपीएस खाते में 24 फीसदी के अंशदान पर टैक्स छूट मिलती है। इसमें 10 फीसदी कर्मचारी का और 14 फीसदी नियोक्ता का हिस्सा रहता है। इसके बाद अप्रैल, 2022 से सभी राज्यों के कर्मचारियों के लिए भी इस आयकर छूट का दायरा बढ़ा दिया गया।

पीएफ खाते पर मिलती है समान छूट

पेंशन फंड नियामक पीएफआरडीए का कहना है कि जब केंद्र और राज्य के कर्मचारियों को उनके नियोक्ता की ओर से किए गए पूरे 14 फीसदी अंशदान पर टैक्स छूट दी जा रही है तो अब निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिलना चाहिए। यदि ऐसा होता है तो एनपीएस पर मिलने वाली टैक्स छूट पीएफ खाते के बराबर पहुंच जाएगी। मौजूदा समय में पीएफ खाते में 12 फीसदी कर्मचारी का अंशदान होता है और 12 फीसदी नियोक्ता का होता है। इस तरह कुल 24 फीसदी राशि पर टैक्स छूट मिलती है।



पेंशन पर भी मानक कटौती देने का प्रस्ताव
सूत्रों का कहना है कि पीएफआरडीए ने एनपीएस के तहत मिलने वाली पेंशन पर भी मानक कटौती के रूप में 50 हजार रुपये की छूट देने का प्रस्ताव किया है। वर्तमान समय में नौकरी के दौरान वेतन पर 50 हजार रुपये का मानक कौटती का फायदा मिलता है। वहीं पेंशन पर भी कुछ नियोक्ता इसका लाभ देते हैं। लेकिन, एनपीएस के तहत पेंशन थर्ड पार्टी सेवा प्रदाता की तरफ से दी जाती है जिसकी वजह से इस राशि को अन्य आमदनी के रूप में लिया जाता है और इसपर मानक कटौती का लाभ नहीं मिलता है।