भर्ती के इंतजार में बूढ़े हो रहे हजारों बेरोजगार, 2018 के बाद से प्राथमिक शिक्षक भर्ती नहीं, पेपरलीक ने बिगाड़ा आयोग का कैलेंडर

 प्रयागराज। सरकारी नौकरी पाने की चाहत में पूरे प्रदेश से प्रयागराज आने वाले युवा पढ़ाई-लिखाई करने के बाद भर्ती के इंतजार में बूढ़े हुए जा रहे हैं। हजारों छात्र आवेदन किए बगैर ही ओवरएज होने के कारण नौकरी की रेस से बाहर हो रहे हैं। सालों बाद भर्ती आ भी जाए तो नकल माफिया पेपर लीक कराकर उनके मंसूबों पर पानी फेरने में कसर नहीं छोड़ते। पेपरलीक का ही नतीजा है कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का कैलेंडर बिगड़ गया है तो वहीं 2018 के बाद आई सिपाही भर्ती के आवेदक सालों बाद फिर से मायूस घर बैठे हैं।



वहीं दूसरी ओर तमाम प्रयासों के बावजूद सात साल बाद भी उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सक्रिय नहीं होने के कारण लाखों युवाओं के सपनों को पंख नहीं लग पा रहे। उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के विलय के लिए पहली बैठक 19 जुलाई 2017 को लखनऊ में हुई थी। उसके तकरीबन सात साल बीतने के बाद चयन बोर्ड की बिल्डिंग पर आयोग का बोर्ड टंगने के साथ 12 सदस्यों की नियुक्ति तो हो गई है लेकिन अब तक नियमित अध्यक्ष, परीक्षा नियंत्रक और सचिव की नियुक्ति नहीं हो सकी है।


इस आयोग के माध्यम से ही बेसिक शिक्षा परिषद के डेढ़ लाख से अधिक स्कूलों के अलावा 4500 से अधिक सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों से लेकर प्रधानाचार्य तक, सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों और 331 महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर और प्राचार्य आदि में नियुक्ति होनी है। हालांकि अभी आयोग का कामकाज कब शुरू होगा इसे लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।


आखिरी बार कब आई, कौन सी भर्ती


●प्राथमिक शिक्षक भर्ती -2018


●सहायक अध्यापक राजकीय विद्यालय -2018


●प्रवक्ता राजकीय इंटर कॉलेज -2020


●असिस्टेंट प्रोफेसर राजकीय महाविद्यालय -2020


●खंड शिक्षा अधिकारी -2019


●तकनीकी सहायक -2015


●राजस्व निरीक्षक -2015


●परिवहन निरीक्षक -2017


●सहायक सांख्यकीय अधिकारी -2018


●प्रधानाचार्य एडेड माध्यमिक विद्यालय- 2013


●वन दरोगा -2018


●बोरिंग टेक्नीशियन -2019


●वन रक्षक -2018


● संजोग मिश्र


विवादों के कारण पूरी नहीं हो सकी भर्ती


कई भर्तियां विवाद के कारण पूरी नहीं हो सकी हैं। प्रदेश के 3049 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापकों व सहायक अध्यापकों के 1894 पदों पर भर्ती तीन साल में पूरी नहीं हुई है। हाईकोर्ट के आदेश पर 17 अक्टूबर 2021 को भर्ती के लिए लिखित परीक्षा हुई। नवंबर 2021 को घोषित परिणाम हाईकोर्ट के आदेश पर सितंबर 2022 को संशोधित किया गया। इसी प्रकार एडेड माध्यमिक स्कूलों में प्रधानाचार्य भर्ती 2013 भी विवादों में फंसी है। प्रधानाचार्य के 632 पदों पर भर्ती के लिए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने 2013 में प्रक्रिया शुरू की। लंबी लड़ाई के बाद चयन बोर्ड ने नवंबर 2022 के बीच 632 में से 581 पदों का परिणाम घोषित किया था। इनमें से तकरीबन आधे शिक्षक ही कार्यभार ग्रहण कर सके थे कि हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने चयन प्रक्रिया में नौ साल का समय लगने पर फरवरी 2023 में भर्ती निरस्त कर दी।


सेवायोजन कार्यालय में पंजीकृत


वर्ष- बेरोजगार


2019- 1,65,807

2020- 1,74,417

2021- 1,93,093

2022 -1,63,946

2023- 1,72,787


5180 पदों पर विज्ञापन के बावजूद भर्ती नहीं

प्रदेश में शिक्षकों के 5180 पदों पर विज्ञापन के बावजूद भर्ती पूरी नहीं हो सकी है। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने एडेड कॉलेजों में असि. प्रोफेसर के 1017 पदों पर भर्ती के 2022 में आवेदन लिए थे। इसके लिए लगभग एक लाख अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया था। अब यह भर्ती नए आयोग से पूरी होनी है। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) के 3539 और प्रवक्ता (पीजीटी) के 624 कुल 4163 पदों पर भर्ती के लिए जून 2022 में आवेदन लिए थे। इन पदों के लिए लाखों अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। यह भर्ती भी अब नए आयोग से होनी है।


संबद्ध संस्कृत विद्यालयों में भर्ती नहीं

प्रदेश के सहायता प्राप्त हाईस्कूल एवं इंटर कॉलेजों से संबद्ध प्राइमरी और संस्कृत विद्यालयों में भी सालों से नियमित शिक्षक भर्ती नहीं हो सकी है। 973 संस्कृत विद्यालय एवं महाविद्यालय में रिक्त सहायक अध्यापकों के 978 और 573 संबद्ध प्राइमरी स्कूलों में खाली शिक्षकों के सैकड़ों पदों की भर्ती का इंतजार खत्म नहीं हो रहा। वर्ष 1994 से माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में कोई नियुक्ति नहीं की गई है। दो साल पहले संविदा पर शिक्षकों को रखा गया था।


शिक्षकों के 50 हजार से अधिक पद खाली

परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 50 हजार से अधिक पद खाली हैं। सरकार ने 12 जून 2020 को सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी थी कि उस यूपी के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के 51112 पद खाली थे। उसके बाद हर साल औसत छह-सात हजार शिक्षकों की ही सेवानिवृत्ति मान ली जाए तो तीन साल में तकरीबन 20 हजार और पद खाली हो गए। हालांकि 2018 के बाद से नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।