13 January 2026

यूपी के प्राथमिक शिक्षा विभाग में समायोजन पर चारों ओर स्टे ही स्टे!

यूपी के प्राथमिक शिक्षा विभाग में समायोजन पर चारों ओर स्टे ही स्टे!

उत्तर प्रदेश का प्राथमिक शिक्षा विभाग इन दिनों अभूतपूर्व प्रशासनिक ठहराव का सामना कर रहा है। समायोजन की प्रक्रिया, जो शिक्षकों को एक संतुलित और न्यायसंगत तरीके से विद्यालयों में तैनात करने का माध्यम थी, अब न्यायालयी रोकों (स्टे) के जाल में पूरी तरह उलझ गई है।


समायोजन पर जारी स्टे की स्थिति

  1. कनिष्ठ शिक्षकों के समायोजन पर स्टे – जिला स्तर पर कई शिक्षकों के समायोजन आदेशों को न्यायालय ने रोक दिया है, जिससे ये शिक्षक पुनः अनिश्चितता में हैं।

  2. वरिष्ठ शिक्षकों के समायोजन पर स्टे – वरिष्ठ शिक्षकों के मामलों में भी आदेश पारित नहीं हो पा रहे हैं, जिससे अनेक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।

  3. ऐच्छिक समायोजन से एकल शिक्षक विद्यालय बनाकर गए शिक्षकों पर स्टे – जो शिक्षक अपनी इच्छा से किसी विद्यालय से स्थानांतरित हुए थे, उनके समायोजन पर भी स्थगन के आदेश हैं।

  4. एकल शिक्षक विद्यालयों में भेजे गए समायोजित शिक्षकों पर स्टे – इस निर्णय से उन विद्यालयों के बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं, जहां अब कोई शिक्षक स्थायी रूप से तैनात नहीं है।

प्रशासनिक विफलता या सिस्टम का ठहराव?

यह विडंबना है कि यदि कोई छोटा कर्मचारी लापरवाही करता, तो तत्काल निलंबन या सेवा समाप्ति की कार्यवाही शुरू हो जाती। लेकिन जब उच्च प्रशासनिक स्तर पर निर्णय और प्रक्रियाएं न्यायालय में टिक नहीं पा रही हैं, तब जिम्मेदारी तय करने वाला कोई नहीं दिखता।

शिक्षा व्यवस्था का संचालन आज "राम भरोसे" चल रहा है। शिक्षक फँसे हैं, विद्यार्थी प्रभावित हैं और विभाग चुप है। यह स्थिति न केवल प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि नीति-निर्माण में पारदर्शिता और न्यायिक समीक्षा की अनदेखी लंबे समय से चल रही थी।

आगे का रास्ता

यदि शिक्षा विभाग को इस जटिल स्थिति से बाहर निकलना है, तो आवश्यक है कि—

  • समायोजन नीति को स्पष्ट, न्यायसंगत और सर्वमान्य बनाया जाए।

  • शिक्षकों को न्यायालयों के चक्कर से मुक्त करने हेतु विभाग ठोस कानूनी तैयारी करे।

  • एकल शिक्षक विद्यालयों की समस्या पर तत्काल नियोजन व पुनर्विचार हो।

प्राथमिक शिक्षा की रीढ़ – शिक्षक – आज भ्रम और बेरुख़ी के बीच हैं। जब तक समायोजन नीति में पारदर्शिता और स्थिरता नहीं आती, तब तक शिक्षा सुधार की बात अधूरी ही रहेगी।