इस बार जून-सितंबर के दौरान मानसूनी बारिश सामान्य से आठ फीसदी कम होने की आशंका है। इससे कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मौसम विभाग ने इस अवधि में अलनीनो की आशंका जताई है। इससे स्थिति और ज्यादा चिंताजनक भी हो सकती है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्र और अधिकारियों ने सोमवार को मानसून का दीर्घावधि पूर्वानुमान जारी किया। इस बार मानसूनी बारिश औसत से 8 फीसदी कम होगी। जून-सितंबर के बीच कुल 870 मिलीमीटर औसत बारिश होती है लेकिन इस बार कम 800 मिलीमीटर होगी। यह 1971 -2020 के आंकड़ों पर निर्धारित है।
आईएमडी ने कहा कि पूर्वानुमान में माडलीय त्रुटि 5 फीसदी की हो सकती है। यानी मानसूनी बारिश अनुमान से पांच फीसदी कम या ज्यादा हो सकती है। ज्यादातर इलाकों में बारिश सामान्य से कम ही रहेगी लेकिन पूर्वोत्तर, उत्तर पश्चिम भारत और दक्षिण के कुछ इलाकों में यह सामान्य रह सकती है।
भविष्यवाणी कितनी सटीक होगी, इस तरह समझें
मौसम विभाग के अनुसार सूखे की संभावना यानी बारिश सामान्य से 90 फीसदी या कम की संभावना 35 फीसदी है। सामान्य से कम 90-95 फीसदी की संभावना 31 फीसदी है। सामान्य यानी 96-104 फीसदी की संभावना 27 फीसदी है। सामान्य से अधिक 105-110 की संभावना 6 फीसदी है।
अच्छा-बुरा दोनों असर
1951 से 2025 तक 16 साल ऐसे रहे जब मानसून में अलनीनो हुआ। इससे 8 साल मानसूनी बारिश कम हुई और बाकी 8 साल सामान्य या सामान्य से अधिक। अलनीनो से मानसून पर बुरा और अच्छा दोनों प्रभाव हो सकते हैं। 1951, 1965, 1972, 1982, 1987, 2002, 2009,2015 में सामान्य से कम, जबकि 1953, 1957, 1958, 1963, 1969, 1991 1997 में सामान्य या अधिक बारिश हुई।

