03 June 2026

4 जून को केरलम पहुंचेगा मानसून, दिल्ली-यूपी-बिहार को कब मिलेगी गर्मी से राहत?

 

4 जून को केरलम पहुंचेगा मानसून, दिल्ली-यूपी-बिहार को कब मिलेगी गर्मी से राहत?

सामान्य तिथि से लगभग तीन दिन की देरी के साथ मानसून चार जून को केरलमम पहुंच सकता है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बनी अनुकूल परिस्थितियों के कारण मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और अगले कुछ दिनों में इसके केरलम में प्रवेश करने की संभावना है।



इसके साथ ही दक्षिण भारत के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। आमतौर पर मानसून एक जून के आसपास केरलमम पहुंचता है। यहीं से देश में चार महीने के वर्षा मौसम की शुरुआत मानी जाती है।


4 जून को केरलमम पहुंचेगा मानसून


इस बार मौसम विभाग (आइएमडी) ने पहले 26 मई को मानसून आने का अनुमान जताया था, मगर परिस्थितियां अनुकूल नहीं बनने के कारण इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई। अब विभाग का कहना है कि चार जून के आसपास केरलम में मानसून की दस्तक हो सकती है


उत्तर भारत में कब बदलेगा मौसम?


उत्तर भारत में भी बुधवार से मौसम का मिजाज बदल सकता है। मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वी भारत के लिए भी राहत के संकेत दिए हैं।



दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में मौसम का रुख बदल सकता है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं, गरज-चमक एवं छिटपुट बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे भीषण गर्मी और लू 


केरलम में होगी भारी बारिश


अगले छह से सात दिनों के दौरान केरलमम में कई स्थानों पर सात से 20 सेंटीमीटर तक भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। तमिलनाडु और कर्नाटक के कई हिस्सों में भी भारी बारिश का अनुमान है।



केरलम के कई जिलों में अलर्ट जारी किए गए हैं। बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और बिजली गिरने की घटनाएं भी हो सकती हैं।



हालांकि मानसून के आगमन की खबर के साथ एक अन्य चिंता भी जुड़ी हुई है। इस बार अलनीनो के कारण पूरे मानसून सीजन में सामान्य से दस प्रतिशत तक कम बारिश हो सकती है।



आइएमडी के अनुसार पूरे देश में वर्षा दीर्घकालिक औसत की लगभग 90 प्रतिशत रह सकती है, जो सामान्य से कम श्रेणी की सीमा पर है।



अभी प्रशांत महासागर में तटस्थ स्थिति धीरे-धीरे अलनीनो की ओर बढ़ रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि जून में इसका प्रभाव कमजोर रहेगा, लेकिन सितंबर तक यह मजबूत रूप ले सकता है। ऐसे में मानसून की शुरुआत भले अच्छी दिखाई दे रही हो, लेकिन पूरे सीजन के प्रदर्शन पर मौसम वैज्ञानिकों की नजर बनी रहेगी।