सरकारी संस्थाओं में ऑनलाइन रजिस्ट्री का शासनादेश निरस्त: वकीलों और डीड राइटर्स की आपत्तियों के बाद सरकार का बड़ा फैसला
उत्तर प्रदेश सरकार ने प्राधिकरणों और अन्य सरकारी संस्थाओं में ऑनलाइन रजिस्ट्री से संबंधित जारी शासनादेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। यह निर्णय अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स की ओर से उठाई गई आपत्तियों तथा प्रदेश के कई जिलों में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बाद लिया गया है।
स्टांप एवं पंजीयन विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना था, लेकिन शासनादेश में स्पष्टता की कमी के कारण भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसी वजह से सरकार ने फिलहाल इसे वापस लेने का निर्णय लिया है।
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क्या था ऑनलाइन रजिस्ट्री का प्रस्ताव?
सरकार ने 4 जून को ई-पंजीकरण मॉड्यूल से संबंधित शासनादेश जारी किया था। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विकास प्राधिकरणों, आवास विकास परिषद और अन्य सरकारी संस्थाओं की संपत्तियों की पहली रजिस्ट्री की प्रक्रिया को अधिक डिजिटल और सरल बनाने की योजना थी।
नई व्यवस्था में प्राधिकरण द्वारा तैयार दस्तावेजों को ऑनलाइन संबंधित उप निबंधक कार्यालय भेजने का प्रावधान किया गया था, जिससे नागरिकों का समय और संसाधन बच सके।
क्यों हुआ विरोध?
शासनादेश जारी होने के बाद अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स ने आशंका जताई कि नई व्यवस्था से उनके कार्य और रोजगार पर प्रभाव पड़ सकता है। इसी मुद्दे को लेकर प्रदेश के 32 जिलों में वकीलों की हड़ताल भी शुरू हो गई थी।
विरोध के बाद सरकार ने सभी पक्षों से बातचीत की और उनकी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए शासनादेश को वापस लेने का फैसला किया।
सरकार ने क्या कहा?
स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने कहा कि सरकार अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल प्रक्रिया को आसान बनाना था, किसी के रोजगार को प्रभावित करना नहीं।
मंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में सभी संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद ऐसी व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिससे नागरिकों को बेहतर सुविधा मिले और अधिवक्ताओं व डीड राइटर्स के हित भी सुरक्षित रहें।
फिलहाल क्या होगा?
शासनादेश निरस्त होने के बाद अभी रजिस्ट्री की प्रक्रिया पहले की तरह ही जारी रहेगी। नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू नहीं होगी, जब तक सरकार संशोधित और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं करती।

