05 August 2026

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले में सरकार ने दिया जवाब

लखनऊ। ग्राम पंचायतों में प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मामले में मंगलवार को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। सरकार अदालत की ओर से मांगा गया ब्योरा भी पेश कर दिया। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को निर्धारित की है। इस बीच याचिकाकर्ता सरकार के जवाब का प्रतिउत्तर दाखिल कर सकेंगे।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ के समक्ष मामले में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क्या प्रशासक नियुक्त करने का आदेश सरकार जारी कर सकती है? क्या राज्य सरकार पंचायत चुनाव करवाने में नाकाम रही? अदालत ने राज्य सरकार को समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने का ब्योरा समेत आयोग की कार्रवाई रिपोर्ट भी पेश करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप नारायण माथुर और मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह पेश हुए।

जवाब न देने पर सरकार पर लगाया हर्जाना

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने आदेश के बावजूद जवाब दाखिल न करने पर राज्य सरकार और हरदोई की शाहबाद नगर पालिका परिषद पर 20-20 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने यह आदेश परवेज खान की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिका में तत्कालीन सभासद की पत्नी को दुकान आवंटित किए जाने का मुद्दा उठाया गया है। कोर्ट ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा तलब किया था, लेकिन जवाब न मिलने पर सख्त रुख अपनाते हुए दोनों पक्षों पर हर्जाना लगाया। संवाद हुए। राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने बताया कि मामले को लखनऊ पीठ से इलाहाबाद हाईकोर्ट स्थानांतरित करने की अर्जी भी दाखिल की गई है। संवाद