19 September 2026

फर्जी टीईटी सर्टिफिकेट से मिली नौकरी शून्य, कोर्ट ने कहा-बर्खास्तगी से पहले नियमित विभागीय जांच जरूरी नहीं

 । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि सरकारी नियुक्ति जिस प्रमाणपत्र के आधार पर हुई, वह निर्णायक रूप से फर्जी पाया जाता है तो ऐसी नियुक्ति शुरू से ही शून्य मानी जाएगी। ऐसी नियुक्ति को रद्द करना दंडात्मक बर्खास्तगी नहीं है, इसलिए उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के तहत नियमित विभागीय जांच कराना जरूरी नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने दिया है।



कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में कारण बताओ नोटिस देना और प्राकृतिक न्याय के व्यापक सिद्धांतों का पालन करना पर्याप्त है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सिद्धांत तभी लागू होगा, जब प्रमाणपत्र का फर्जी होना निर्णायक रूप से स्थापित हो चुका हो। रिकॉर्ड में केवल कोई विसंगति सामने आई है और उसके सत्यापन की आवश्यकता है तो उसे फर्जी प्रमाणपत्र मानकर सीधे नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती। मामला वर्ष 2013 की उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा के आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक नियुक्त किए गए अभ्यर्थियों से जुड़ा है। नियुक्ति के बाद उनके शैक्षिक दस्तावेज संबंधित परीक्षा बोर्ड से सत्यापित कराए गए और उन्हें वास्तविक पाया गया। इसके बाद उन्हें नियमित रूप से वेतन भी मिलता रहा। 20 जुलाई 2018 के शासनादेश के तहत वर्ष 2010 के बाद हुई नियुक्तियों की जांच के निर्देश दिए गए। जिला स्तर पर गठित तीन सदस्यीय समिति ने याचियों के टीईटी 2013 प्रमाणपत्रों पर दर्ज अनुक्रमांक को ऑनलाइन रिकॉर्ड से मिलाया तो संबंधित परीक्षा परिणाम का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इसके बाद 28 अक्टूबर 2020 को उनका वेतन रोक दिया गया। कारण बताओ नोटिस जारी कर उनके जवाब लिए गए और अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी इटावा ने 13 जून 2022 के आदेश से उनकी सेवाएं समाप्त कर दीं।


पांच याचियों में अनुपम यादव की बाद में मृत्यु हो गई। याची विवेक कुमार व अन्य की ओर से दलील दी गई कि उनके खिलाफ धोखाधड़ी या गलत जानकारी देने का कोई आरोप नहीं लगाया गया। यह भी कहा गया कि उन्हीं प्रमाणपत्रों का बीएसए ने पांच अगस्त 2021 को सत्यापन कराया था और उन्हें सही पाया। उनका कहना था कि नियमित विभागीय जांच और प्रभावी सुनवाई के बिना सेवाएं समाप्त कर दी गईं। राज्य की ओर से कहा गया कि परीक्षा नियामक प्राधिकरण के ऑनलाइन रिकॉर्ड में याचियों के नाम से कोई परिणाम उपलब्ध नहीं था।