पंचायत प्रतिनिधियों के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने लगा दी उपहारों की झड़ी, जानिए किसे क्या मिला

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले गांवों में विकास की गंगा बहाने और पंचायत प्रतिनिधियों को खुश करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उपहारों की झड़ी लगा दी। सभी पंचायत प्रतिनिधियों का प्रतिमाह 1500 रुपये तक मानदेय बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने ग्राम प्रधानों को 5,000, ब्लाक प्रमुख को 11300 व जिला पंचायत अध्यक्ष को 15500 रुपये देने का ऐलान किया है। अब सूबे के करीब साढ़े सात लाख ग्राम पंचायत सदस्यों को भी मानदेय मिलेगा। सीएम योगी  ने पंचायत प्रतिनिधियों के निधन पर स्वजनों को ग्राम पंचायत कोष से आर्थिक सहायता दिलाने व ग्राम व जिला पंचायतों के प्रशासनिक व वित्तीय अधिकारों में बड़ी बढ़ोतरी करने की भी अहम घोषणा की है।





त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद बनी गांवों की सरकार को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वृंदावन कालोनी में ग्राम उत्कर्ष समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनप्रतिनिधियों से कहा कि सही मायनों में विकास का पैमाना गांव ही हैं, उसे विकास की धुरी मानकर कार्य कराए जाने की जरूरत है। 42,478 ग्राम पंचायत भवनों का लोकार्पण किया गया है, शेष गांवों में भी यह कार्य जल्द पूरा होगा। ग्राम सचिवालय का शुभारंभ हो गया है, ताकि आम लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए शहर की ओर भागना नहीं पड़े। हर गांव में प्रधान, पंचायत सचिव, पंचायत सहायक एक छत के नीचे मिलेंगे और वहां पर बीसी सखी व मिशन शक्ति के तहत पुलिस की महिला बीट अधिकारी भी होगी। उन्होंने कहा कि अब बैंक गांवों में आकर समस्याओं का समाधान करेगा।



सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2020 से अब तक गांवों में 5200 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। विकास के लिए पैसे की कोई कमी नहीं होगी और किसी को भी शोषण करने का अधिकार नहीं रहेगा, बल्कि गांवों में विकास की प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए। कहा कि देश में यूपी नंबर एक की लड़ाई में आगे रहेगा, पेशेवर अपराधी व कोरोना यहां आने से डरेगा। काशी को नव्य व भव्य बनाया जा चुका है, पूर्वी उत्तर प्रदेश को सिंचाई परियोजना की मिल चुकी है और मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाले गंगा एक्सप्रेस वे का शिलान्यास 18 दिसंबर को होगा।




अब बनाइए स्मार्ट गांव : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायत प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि जब स्मार्ट शहर बन सकते हैं तो स्मार्ट गांव बनाइए, जहां मूलभूत सारी सुविधाएं हों। शौच मुक्त गांवों में सालिड वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था, सौर ऊर्जा से जगमगाते रास्ते बनें। पब्लिक एड्रेस सिस्टम हो और सुबह शाम लोग भजन सुने। अगली बार जब मिलेंगे तो स्मार्ट गांव को साकार करने वाले सम्मानित होंगे।


ट्रिपल इंजन बनाएगा नंबर एक इकोनामी का राज्य : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार गांवों की बेहतरी को प्रयासरत है, अब गांवों की सरकार भी साथ चले तो ट्रिपल इंजन प्रदेश को नंबर एक अर्थव्यवस्था वाला राज्य बना देगी। कोरोना के समय मिलकर इसका अहसास करा चुके हैं। उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव विपरीत स्थिति में कराया अब पंचायत प्रतिनिधि मिलकर विकास कराएं।


पांच ग्राम पंचायतें 11-11 लाख रुपये से सम्मानित : मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार से उम्दा कार्य करने वाली पांच ग्राम पंचायतों को 11-11 लाख रुपये से सम्मानित किया गया। इनमें गाजियाबाद जिले की ग्राम पंचायत किल्हौड़ा रघुनाथपुर के प्रधान शैलेंद्र, प्रतापगढ़ जिले के यदुपत्ती ग्राम पंचायत के प्रधान सौरभ सिंह, अयोध्या जिले की सनहा ग्राम पंचायत की प्रधान रीना पांडेय, बाराबंकी जिले की न्यामतपुर ग्राम पंचायत के प्रधान धर्मेंद्र कुमार व मथुरा जिले की ग्राम पंचायत कनेका के ग्राम प्रधान अरविंद कुमार शामिल थे। योजना में कुल 356 ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत किया गया है।


इस तरह बढ़ा मानदेय

नाम : संख्या : पहले : अब
ग्राम प्रधान : 58189 : 3500 : 5000
क्षेत्र पंचायत प्रमुख : 826 : 9800 : 11300
जिला पंचायत अध्यक्ष : 75 : 14000 : 15500
7,44226 ग्राम पंचायत सदस्यों को पहले कोई मानदेय नहीं मिलता था, अब 100 रुपये प्रति बैठक मिलेगा। साल में 12 बैठक अधिकतम हो सकती हैं।
77,788 क्षेत्र पंचायत सदस्यों को अब तक 500 रुपये प्रति बैठक मिल रहा था, अब 1000 रुपये प्रति बैठक मिलेगा। साल में अधिकतम छह बैठक हो सकती हैं।
3121 जिला पंचायत सदस्यों को अब तक 1000 रुपये प्रति बैठक मिल रहा था, अब 1500 रुपये प्रति बैठक मिलेगा। साल में अधिकतम 12 बैठक हो सकती हैं।
इनके बढ़े अधिकार : विकास कार्यों के लिए ग्राम पंचायत के वित्तीय अधिकार दो लाख रुपये प्रति कार्य से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया गया। ऐसे ही जिला पंचायतों के लिए प्रति कार्य 10 लाख की सीमा को बढ़ाकर 25 लाख रुपये किया गया।


प्रशासनिक व तकनीकी अधिकार : ग्राम पंचायतें अपनी परियोजनाओं का स्टीमेट बनाने व एमबी कराने का कार्य विकास खंड के नामित अभियंता के अलावा जिले में कार्यरत लोक निर्माण विभाग, आवास एवं विकास परिषद, विकास प्राधिकरण, सिंचाई विभाग, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, लघु सिंचाई व मंडी समिति, जिला पंचायत के अवर अभियंता, जल निगम के अवर या सहायक अभियंता से करा सकते हैं। इसके अलावा पंचायतीराज निदेशालय की ओर से जिलों के लिए तैयार किए जाने वाले सिविल इंजीनियरिंग के डिप्लोमा व डिग्री होल्डर, रजिस्टर्ड आर्कीटेक्ट के पैनल की ओर से भी निर्धारित फीस पर भी स्टीमेट व एमबी आदि का कार्य कराया जा सकता है।


प्रदेश में बने 15000 क्लस्टर, तैनाती होगी आसान : प्रदेश में भौगोलिक रूप से समीप व परस्पर सटी ग्राम पंचायतों में सचिवों की तैनाती की जाएगी। इसके लिए 15000 क्लस्टर बनाए गए हैं। ज्ञात हो कि ग्राम पंचायत सचिवों की कमी से एक सचिव कई गांवों का काम संभाल रहा है लेकिन दूरी अधिक होने से कार्य प्रभावित होता रहा है।

ग्राम पंचायत कोष की स्थापना : पंचायत प्रतिनिधियों के पद पर रहने के दौरान मृत्यु होती है तो स्वजनों को आर्थिक सहायता देने के लिए ग्राम पंचायत कोष की स्थापना की गई है। अध्यक्ष जिला पंचायत को 10 लाख, सदस्य जिला पंचायत को पांच लाख, सदस्य क्षेत्र पंचायत को तीन लाख और सदस्य ग्राम पंचायत को दो लाख रुपये मिलेंगे।

ग्राम पंचायतें कर सकेंगी मनरेगा का भुगतान : प्रदेश में मनरेगा योजना में मजदूरी व मैटेरियल का भुगतान अब ग्राम पंचायतें कर सकेंगी। अगले तीन माह के अंदर ग्राम प्रधान के डिजिटल सिग्नेचर से भुगतान हो सकेगा। ज्ञात हो कि अभी तक यह कार्य ब्लाक स्तर से किया जाता है। इसके लिए दो विकासखंडों लखनऊ जिले के मोहनलालगंज व हरदोई जिले की अहिरोरी को पायलट प्रोजेक्ट के तहत चुना गया है।

जिला योजना में गांवों की भागीदारी : जिला योजना में गांवों को भी भागीदारी मिलेगी। जिला योजना समिति के लिए दो ग्राम प्रधानों को चक्रानुक्रम में एक वर्ष के लिए जिलाधिकारी नामित करेंगे।

डीएम व एसएसपी प्रधानों की प्रधानों के साथ बैठक : हर जिले में जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तीन माह में एक बार ग्राम प्रधान व पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। उनका सुझाव लेंगे और समस्याओं का निस्तारण कराएंगे।

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