प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) के एक आदेश पर रोक लगा दी है। यह आदेश जनगणना कार्य हेतु निजी स्कूलों के कर्मचारियों की सूची मांगने से संबंधित था। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसे संस्थानों के कर्मचारी जनगणना ड्यूटी के लिए बाध्य नहीं किए जा सकते।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने स्ववित्तपोषित स्कूल एसोसिएशन की याचिका पर यह आदेश दिया। एसोसिएशन ने डीआईओएस के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें निजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों व प्रबंधन से कर्मचारियों की सूची मांगी गई थी।
याचिका में कहा गया कि जनगणना अधिनियम-1948 की धारा-4ए के तहत केवल लोक प्राधिकरण ही कर्मचारी उपलब्ध करा सकते हैं। निजी शिक्षण संस्थान न तो राज्य सरकार के नियंत्रण में हैं और न ही उसकी इकाई, इसलिए वे जनगणना ड्यूटी के लिए बाध्य नहीं हैं।
एसोसिएशन के अधिवक्ता ने दलील दी कि अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट ने केवल सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों की सूची मांगी थी। डीआईओएस ने निजी संस्थानों के कर्मचारियों की सूची मांगकर इसका दायरा बढ़ा दिया। राज्य सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 का हवाला दिया, लेकिन एसोसिएशन ने कहा कि यह प्रावधान केवल सरकारी संस्थानों पर लागू होता है।
कोर्ट ने डीआईओएस के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई और पक्षकारों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
जनगणना में लापरवाही पर एफआईआर
अलीगढ़ : जनगणना-2027 के तहत चल रहे मकान गणना अभियान में लापरवाही बरतने वाले आठ कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने बताया कि 22 मई से 20 जून तक मकान गणना और भवन सूचीकरण कार्य की समय-सीमा निर्धारित की गई थी, लेकिन संबंधित कर्मियों ने अपने आवंटित क्षेत्रों में प्रभावी रूप से कार्य नहीं किया और जनगणना कार्य में शिथिलता बरती।

