लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में ‘बाल श्रमिक विद्या योजना’ लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सेवायोजन विभाग को आधुनिक और प्रभावी रोजगार तंत्र के रूप में विकसित किया जाए, ताकि श्रमिकों, युवाओं और कमजोर वर्गों को बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।
मुख्यमंत्री ने श्रम एवं सेवायोजन विभाग की योजनाओं और कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि निर्माण श्रमिकों के लिए बड़े शहरों में आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र स्थापित किए जाएं। इन केंद्रों को रोजगार मिलने की प्रक्रिया से भी जोड़ा जाएगा।
8 से 18 वर्ष के बच्चों को मिलेगा लाभ
योजना के तहत 8 से 18 वर्ष तक के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी बच्चा आर्थिक मजबूरी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। इसके लिए विशेष अभियान चलाकर बच्चों को स्कूलों से जोड़ा जाए।
प्रदेश में बढ़े उद्योग और रोजगार
बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में अब तक 32,583 कारखाने पंजीकृत हो चुके हैं। मार्च 2017 तक यह संख्या 14,176 थी, जबकि अब तक 4,860 नए कारखानों का पंजीकरण हुआ है। मुख्यमंत्री ने सभी औद्योगिक क्षेत्रों में आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र यानी ‘लेबर अड्डे’ विकसित करने के निर्देश दिए।
रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुसार प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना समय की मांग है। कानपुर में प्रस्तावित औद्योगिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान और छात्रावास योजना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी। इससे प्रदेश के युवाओं को ग्रामीण, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।
एआई आधारित जॉब पोर्टल पर जोर
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 3030 रोजगार मेलों और कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से 3,74,776 युवाओं को रोजगार के अवसर दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने सेवायोजन विभाग को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक और डिजिटल रोजगार तंत्र के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जर्मनी, जापान और स्लोवाक गणराज्य समेत विभिन्न देशों में रोजगार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में युवाओं को विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के लिए तैयार किया जाए।

