24 May 2026

आंधी-तूफान से पहले मिलेगा सटीक अलर्ट; योगी सरकार की नई तैयारी, डॉप्लर वेदर रडार नेटवर्क पर जोर

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में मौसम संबंधी पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक सटीक, त्वरित और जनकेंद्रित बनाने के निर्देश दिए हैं। शनिवार को राहत एवं आपदा प्रबंधन विभाग की समीक्षा बैठक में सीएम ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समय पर दी गई सही सूचना अनेक लोगों की जान बचा सकती है। इसलिए मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी तंत्र को केवल तकनीकी व्यवस्था तक सीमित न रखकर अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सीएम ने गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों में “लास्ट माइल कनेक्टिविटी” मजबूत करने के निर्देश देते हुए कहा कि आईवीआरएस, पंचायत स्तर के लाउडस्पीकर, स्थानीय एफएम रेडियो, मोबाइल अलर्ट और सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग किया जाए।




अलर्ट तभी प्रभावी, जब समय पर लोगों तक पहुंचे- CM योगी

उन्होंने कहा कि चेतावनी तभी प्रभावी मानी जाएगी जब वह समय पर आम लोगों तक पहुंचे और लोग उसके अनुसार सतर्कता बरत सकें। बैठक में 13 मई 2026 को आए भीषण आंधी-तूफान की समीक्षा भी प्रस्तुत की गई। अधिकारियों ने बताया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग के मल्टी-हैजार्ड अर्ली वार्निंग सिस्टम द्वारा इस घटना की सात दिन पहले से निगरानी की जा रही थी। शुरुआत में येलो वार्निंग जारी की गई, जिसे बाद में ऑरेंज और कई जिलों में रेड अलर्ट में अपग्रेड किया गया। चेतावनी में तेज आंधी, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और 60 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक रफ्तार वाली हवाओं की आशंका जताई गई थी। कई इलाकों में हवा की रफ्तार 80 से 130 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई।


  ‘सचेत’ प्लेटफॉर्म से कलर कोडेड अलर्ट

भदोही, प्रयागराज, फतेहपुर, लखनऊ, मिर्जापुर, रायबरेली, कानपुर नगर और उन्नाव समेत कई जिलों के लिए नाउकास्ट अलर्ट जारी किए गए थे। “सचेत” प्लेटफॉर्म के माध्यम से जिला प्रशासन, डीडीएमए, आपदा मित्रों और संबंधित विभागों तक कलर-कोडेड अलर्ट भेजे गए। प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय मोबाइल फोनों पर एसएमएस आधारित चेतावनियां भी जारी की गईं। स्थानीय टीवी चैनलों, एफएम रेडियो, व्हाट्सएप समूहों, ग्राम प्रधानों, लेखपालों तथा आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के जरिए भी सूचनाओं का व्यापक प्रसार किया गया।


मौसम की चेतावनी के लिए जागरूकता बढ़ाई जाए

सीएम योगी ने कहा कि चेतावनी जारी करने के साथ-साथ लोगों में सुरक्षित व्यवहार को लेकर जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है। उन्होंने स्कूलों, पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान चलाने तथा पेड़ों, बिजली के खंभों, होर्डिंग्स और कमजोर अस्थायी ढांचों का स्थानीय स्तर पर आकलन कर एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए।



 डॉप्लर वेदर रडार पर जोर

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 450 ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और 2000 ऑटोमैटिक रेन गेज स्थापित किए जा चुके हैं। अलीगढ़, झांसी, लखनऊ, वाराणसी और आजमगढ़ में डॉप्लर वेदर रडार लगाए जा रहे हैं, जबकि बरेली, देवरिया और प्रयागराज में अतिरिक्त रडार स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है।