24 May 2026

पीएम पोषण योजना में उत्कृष्ट कार्य करने वाली रसोइयों को मिलेगा सम्मान, प्रदेशभर में पाक-कला प्रतियोगिता आयोजित

पीएम पोषण योजना में उत्कृष्ट कार्य करने वाली रसोइयों को मिलेगा सम्मान, प्रदेशभर में पाक-कला प्रतियोगिता आयोजित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ बेहतर पोषण और संस्कार देने की दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (पीएम पोषण योजना) के तहत प्रदेश के 1.42 करोड़ विद्यालयी बच्चों को मिड-डे मील उपलब्ध कराया जा रहा है। अब इस योजना के सफल संचालन में अहम भूमिका निभाने वाली रसोइयों को भी सम्मानित और प्रोत्साहित किया जाएगा।

रसोइयों को मिलेगा पुरस्कार और प्रोत्साहन

प्रदेश सरकार ने रसोइयों को “पोषण प्रहरी” के रूप में पहचान देने का निर्णय लिया है। इसके तहत जिलों में रसोइया पाक-कला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली रसोइयों को पुरस्कार राशि भी दी जाएगी।

  • प्रथम पुरस्कार – ₹3500

  • द्वितीय पुरस्कार – ₹2500

  • तृतीय पुरस्कार – ₹1500

इसके अलावा ट्रेनिंग प्राप्त सभी रसोइयों को सांत्वना पुरस्कार भी प्रदान किया जा रहा है।

3.53 लाख से अधिक रसोइयों की अहम भूमिका

प्रदेश में पीएम पोषण योजना के संचालन में 3.53 लाख से अधिक रसोइयां कार्यरत हैं। ये रसोइयां प्रतिदिन लाखों बच्चों के लिए पौष्टिक और स्वच्छ भोजन तैयार करती हैं। सरकार का मानना है कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को बेहतर बनाने में इनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।

वाराणसी प्रतियोगिता में दिखा स्वाद और स्वच्छता का बेहतर समन्वय

वाराणसी में आयोजित पाक-कला प्रतियोगिता में रसोइयों ने स्वाद, स्वच्छता और पौष्टिकता का शानदार प्रदर्शन किया। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की प्रतियोगिताओं से रसोइयों में नई ऊर्जा आएगी और विद्यालयों में बच्चों को बेहतर भोजन उपलब्ध कराने की प्रेरणा मिलेगी।

केंद्र सरकार दे रही अतिरिक्त मानदेय

प्रदेश में कार्यरत रसोइयों को केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित मानदेय के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ₹1000 अतिरिक्त मानदेय भी दिया जा रहा है। वहीं, परिषदीय विद्यालयों की 500 गर्भवती रसोइयों को सहायता राशि भी प्रदान की जा रही है।

सरकार का कहना है कि पीएम पोषण योजना का उद्देश्य केवल बच्चों को भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य, पोषण और समग्र विकास को सुनिश्चित करना भी है।