स्वास्थ्य विभाग में नियमों के विपरीत डार्क रूम सहायकों की नियुक्ति का आरोप, जांच की मांग तेज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग में डार्क रूम सहायकों की नियुक्तियों को लेकर नया विवाद सामने आया है। आरोप है कि विभाग में भर्ती और मृतक आश्रित नियुक्तियों से जुड़े नियमों की अनदेखी कर कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति दे दी गई। मामला सामने आने के बाद इसकी जांच की मांग तेज हो गई है।
2021 से मृतक आश्रित नियुक्तियों पर लगी है रोक
जानकारी के अनुसार, 1 जुलाई 2021 को तत्कालीन स्वास्थ्य महानिदेशक द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि डार्क रूम सहायक पद पर मृतक आश्रित के आधार पर नियुक्ति संबंधी प्रकरण महानिदेशालय को न भेजे जाएं। इसके बावजूद बाद के वर्षों में कुछ मृतक आश्रितों को इस पद पर नियुक्ति दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं।
2024 में भी हुई नियुक्तियां
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 के बाद स्वास्थ्य विभाग में डार्क रूम सहायक पद पर नियमित भर्ती नहीं हुई, क्योंकि यह पद मानव संपदा पोर्टल पर उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद वर्ष 2021 से 2024 के बीच कई नियुक्तियां किए जाने का दावा किया गया है। इन नियुक्तियों को लेकर विभागीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
शासन से जांच कराने की मांग
मामले में आरोप लगाया गया है कि नियमों के विपरीत नियुक्तियां किए जाने से विभागीय प्रक्रियाओं की पारदर्शिता प्रभावित हुई है। इस संबंध में शासन को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल करने की मांग की गई है।
स्वास्थ्य विभाग का पक्ष
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसकी जांच कराई जाएगी। विभाग का दावा है कि पहले से चल रहे कुछ मामलों की भी जांच जारी है और यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मानव संपदा पोर्टल के आंकड़ों पर सवाल
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2021 में जहां डार्क रूम सहायकों के 478 पद दर्शाए गए थे, वहीं वर्ष 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 544 हो गई। ऐसे में पदों की स्थिति और नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, जिनका जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मुख्य बिंदु
डार्क रूम सहायकों की नियुक्तियों में अनियमितता के आरोप।
मृतक आश्रित नियुक्तियों पर 1 जुलाई 2021 से रोक का दावा।
2021 से 2024 के बीच हुई नियुक्तियां जांच के घेरे में।
शासन स्तर पर जांच की मांग।
स्वास्थ्य विभाग ने जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया।
मानव संपदा पोर्टल के आंकड़ों को लेकर भी उठे सवाल।

