08 June 2026

UP Primary School Reopening Date 2026: यूपी के बेसिक स्कूल इस दिन खुलेंगे, नए सत्र से ये काम अनिवार्य, शिक्षकों को जिम्मा

यूपी के प्राइमरी स्कूलों में नए सत्र की शुरुआत, निपुण तालिका से होगी बच्चों की प्रगति का आकलन

उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राइमरी स्कूलों में इस समय गर्मियों की छुट्टियां चल रही हैं। 20 मई से स्कूल बंद हैं और 15 जून तक बंद रहेंगे। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत 16 जून, 2026 को होगी। इस दिन से स्कूलों में छात्र-छात्राओं का स्वागत किया जाएगा और साथ ही नए सत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव भी लागू होगा।



निपुण तालिका: बच्चों की सीखने की प्रगति का नियमित आकलन

नए शैक्षणिक सत्र से परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक से तीन तक के बच्चों की शैक्षणिक प्रगति का नियमित आकलन करने के लिए निपुण तालिका तैयार करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह व्यवस्था निपुण भारत मिशन के तहत लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान (एफएलएन) को मजबूत करना है।

इस तालिका के माध्यम से शिक्षक प्रत्येक छात्र की सीखने की प्रगति का रिकॉर्ड रखेंगे। इसमें पढ़ने, लिखने, समझने और गणितीय कौशल से जुड़े विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन किया जाएगा। इससे यह पता चलेगा कि कौन से बच्चे निर्धारित कौशल हासिल कर चुके हैं और किन्हें अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है। इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी होगा कि अभिभावक अपने बच्चों की वास्तविक शैक्षणिक प्रगति को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।


27 दिन की गर्मी की छुट्टियां, 16 जून से खुलेंगे स्कूल

इस साल प्रदेश के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में 20 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश रहा है। इस प्रकार, छात्रों को कुल 27 दिन की छुट्टियां मिली हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग के अनुसार, 15 जून तक गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने के बाद 16 जून, 2026 से सभी स्कूल फिर से खुल जाएंगे। इस दिन से बच्चे नियमित रूप से अपनी कक्षाओं में लौटेंगे।

स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नए सत्र की तैयारी पहले से कर लें। स्कूल परिसरों को साफ-सुथरा और व्यवस्थित किया जाएगा। सत्र के पहले दिन छात्रों का स्वागत किया जाएगा।


बेसिक शिक्षा अधिकारी का बयान

गोरखपुर के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) धीरेंद्र त्रिपाठी ने कहा, "निपुण तालिका के प्रभावी क्रियान्वयन से प्राथमिक स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इसके आधार पर शिक्षक कमजोर छात्रों की पहचान कर उन पर विशेष ध्यान दे सकेंगे।"