प्रदेश को मिले 35 नए माध्यमिक विद्यालय, 55 करोड़ रुपये से होंगे अपग्रेड; कई जिलों में 12वीं तक की पढ़ाई होगी शुरू
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्रालय ने प्रदेश के 31 बेसिक विद्यालयों को हाईस्कूल तथा चार हाईस्कूलों को इंटर कॉलेज के रूप में अपग्रेड करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद प्रदेश को 35 नए माध्यमिक विद्यालय मिलेंगे। इस परियोजना के लिए करीब 55 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है।
एक ही परिसर में पहली से इंटर तक की पढ़ाई का लक्ष्य
राज्य सरकार का उद्देश्य छात्रों को एक ही परिसर में कक्षा 1 से 12 तक शिक्षा उपलब्ध कराना है, ताकि बीच में पढ़ाई छोड़ने (ड्रॉपआउट) की समस्या कम हो सके। इसके तहत प्रत्येक जिले में सीएम मॉडल और अभ्युदय मॉडल कंपोजिट विद्यालयों के निर्माण के साथ-साथ पहले से संचालित विद्यालयों को भी चरणबद्ध तरीके से अपग्रेड किया जा रहा है।
31 विद्यालय हाईस्कूल और 4 इंटर कॉलेज बनेंगे
हाल ही में हुई प्रोजेक्ट एडवाइजरी बोर्ड (PAB) की बैठक में प्रदेश के 31 जूनियर हाईस्कूल, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों को हाईस्कूल स्तर तक अपग्रेड करने की मंजूरी दी गई। इस कार्य पर 46.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इसके अलावा चार हाईस्कूलों को इंटर कॉलेज में अपग्रेड किया जाएगा, जिस पर 8.84 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इन विद्यालयों में 11वीं और 12वीं की पढ़ाई शुरू कराने के लिए आवश्यक कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
इन जिलों के विद्यालय होंगे अपग्रेड
योजना के तहत चित्रकूट के दो, गाजियाबाद और ललितपुर के एक-एक राजकीय हाईस्कूल को इंटर कॉलेज बनाया जाएगा।
वहीं सीतापुर, संभल, मिर्जापुर, चित्रकूट, हरदोई, श्रावस्ती, गोंडा, बरेली, बुलंदशहर, सोनभद्र, पीलीभीत और बांदा के दो-दो विद्यालय, झांसी के चार तथा ललितपुर के आठ जूनियर हाईस्कूल, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों को हाईस्कूल स्तर पर अपग्रेड किया जाएगा। इससे इन विद्यालयों में कक्षा 9 और 10 की पढ़ाई शुरू हो सकेगी।
पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों को मिलेगा लाभ
सरकार का कहना है कि इस योजना का सबसे अधिक लाभ उन जिलों के विद्यार्थियों को मिलेगा, जहां माध्यमिक शिक्षा की सुविधाएं सीमित हैं। विद्यालयों के अपग्रेड होने के बाद छात्रों को उच्च कक्षाओं की पढ़ाई के लिए दूसरे क्षेत्रों में जाने की आवश्यकता कम होगी और स्थानीय स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी।
इस पहल से विशेष रूप से गोंडा, श्रावस्ती, सीतापुर, ललितपुर सहित कई जिलों के हजारों विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि इससे माध्यमिक शिक्षा तक पहुंच बढ़ेगी और स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में भी कमी आएगी।

