03 July 2026

अब गांवों में पता पूछने की जरूरत नहीं! नाम और यूनिक कोड से पहचानी जाएंगी सड़कें, केंद्र सरकार की नई पहल

अब गांवों में पता पूछने की जरूरत नहीं! नाम और यूनिक कोड से पहचानी जाएंगी सड़कें, केंद्र सरकार की नई पहल

नई दिल्ली: अब गांवों में किसी घर या स्थान तक पहुंचने के लिए पेड़, मंदिर, कुआं, चौपाल या अन्य स्थानीय पहचान बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी। केंद्र सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों को डिजिटल पहचान देने की तैयारी कर रही है। इस नई व्यवस्था के तहत गांवों की हर सड़क को नाम (Road Name) और यूनिक डिजिटल कोड दिया जाएगा, जिससे किसी भी स्थान तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा।

सड़कों को मिलेगा डिजिटल नाम और यूनिक कोड

पंचायतीराज मंत्रालय ने ग्रामीण सड़कों की रोड कोडिंग एवं एड्रेसिंग सिस्टम विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत प्रत्येक सड़क को एक यूनिक रोड कोड और डिजिटल पहचान दी जाएगी। यह जानकारी QR Code स्कैन करके भी प्राप्त की जा सकेगी।

इस पहल का उद्देश्य गांवों की सड़कों को डिजिटल भारत मिशन से जोड़ना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी आधुनिक एड्रेसिंग सिस्टम विकसित किया जा सके।

पहली बार गांवों की आंतरिक सड़कों को मिलेगी पहचान

यह पहली बार होगा जब पंचायत क्षेत्रों की आंतरिक सड़कों को भी आधिकारिक नाम और डिजिटल पहचान मिलेगी। नई प्रणाली लागू होने के बाद किसी भी व्यक्ति को गांव में किसी स्थान तक पहुंचने के लिए स्थानीय लोगों से रास्ता पूछने की आवश्यकता नहीं होगी। मोबाइल या डिजिटल मैप पर सड़क का नाम और यूनिक कोड दर्ज करते ही सही स्थान तक पहुंचा जा सकेगा।

QR Code स्कैन करते ही मिलेगी पूरी जानकारी

नई व्यवस्था में सड़कों पर लगाए जाने वाले QR Code को स्कैन करने पर संबंधित सड़क की विस्तृत जानकारी उपलब्ध होगी। इसमें सड़क का नाम, यूनिक कोड, स्थान और अन्य आवश्यक विवरण शामिल होंगे। इससे डाक, एम्बुलेंस, पुलिस, फायर ब्रिगेड, ई-कॉमर्स कंपनियों और अन्य आपातकालीन सेवाओं को सही पते तक पहुंचने में आसानी होगी।

देश के लाखों गांवों को मिलेगा लाभ

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 3.38 लाख गांवों का अधिसूचना कार्य पूरा हो चुका है और करीब 3.3 लाख गांवों को ड्रोन सर्वे से भी जोड़ा जा चुका है। अब इन गांवों की सड़कों को डिजिटल पहचान देने की दिशा में काम किया जा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेगी सुविधा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई प्रणाली से ग्रामीण क्षेत्रों में नेविगेशन, सरकारी सेवाओं की पहुंच, आपातकालीन सहायता, डाक वितरण और ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं में बड़ा सुधार होगा। साथ ही गांवों का डिजिटल रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित होगा और भविष्य में स्मार्ट ग्रामीण विकास योजनाओं को भी गति मिलेगी।