27 August 2026

45 दिन की पैरेंट्स केयर लीव पर वायरल दावा निकला भ्रामक, राज्यसभा में बिल पेश जरूर हुआ लेकिन अभी कानून नहीं

 

45 दिन की पैरेंट्स केयर लीव पर वायरल दावा निकला भ्रामक, राज्यसभा में बिल पेश जरूर हुआ लेकिन अभी कानून नहीं

नई दिल्ली। सरकारी कर्मचारियों को माता-पिता की देखभाल के लिए 45 दिन का सवैतनिक अवकाश मिलने संबंधी एक संदेश इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि ‘पवित्र बंधन (माता-पिता देखभाल अवकाश) विधेयक, 2026’ राज्यसभा में मंजूर हो गया है और कर्मचारियों को 45 दिन की पेड लीव का अधिकार मिल गया है।

हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक संसदीय रिकॉर्ड के आधार पर वायरल दावे की सबसे महत्वपूर्ण बात सही नहीं है।

राज्यसभा में पेश हुआ था विधेयक

रिकॉर्ड के अनुसार The Sacred Bond (Parent Care Leave) Bill, 2026 वास्तव में मौजूद है। यह Bill No. XXV of 2026 है और इसे 13 मार्च 2026 को राज्यसभा में पेश किया गया था।

महत्वपूर्ण बात यह है कि आधिकारिक संसदीय प्रति पर इसे “As Introduced in the Rajya Sabha” के रूप में दर्ज किया गया है। यानी यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया गया था, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि इसे सदन ने पारित कर दिया है।


अभी कानून नहीं बना है

उपलब्ध विधायी रिकॉर्ड में इस विधेयक की स्थिति “Pending” बताई गई है। यानी यह अभी लंबित है और इसे संसद से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही कानून का रूप मिलेगा।

इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहा यह दावा कि “राज्यसभा में बिल मंजूर हो गया और 45 दिन की छुट्टी लागू हो गई” भ्रामक है।

कर्मचारियों को अभी 45 दिन की छुट्टी का अधिकार नहीं

फिलहाल केवल इस विधेयक के पेश होने के आधार पर सरकारी कर्मचारियों को 45 दिन का सवैतनिक माता-पिता देखभाल अवकाश मिलने की बात कहना सही नहीं होगा।

फैक्ट चेक निष्कर्ष:
🔴 “बिल राज्यसभा में मंजूर हो गया” — गलत/भ्रामक दावा
🟢 “The Sacred Bond (Parent Care Leave) Bill, 2026 राज्यसभा में पेश हुआ” — सही
🟠 विधेयक की स्थिति — Pending

इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल संदेश को बिना आधिकारिक पुष्टि के आगे साझा करने से बचें। बिल पेश होना और कानून बन जाना, दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।