निजी स्कूलों में आरटीई के तहत दाखिलों का ब्यौरा मांगा
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी सहायता प्राप्त तथा गैर-सहायता प्राप्त प्राथमिक स्कूलों में मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा (आरटीई) उपलब्ध कराने से संबंधित दाखिलों का पूरे प्रदेश का जिलावार ब्यौरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्कूल चाहे सीबीएसई, सीआईएससीई या किसी अन्य बोर्ड से संबद्ध हों अथवा राज्य के भीतर प्रारंभिक शिक्षा प्रदान कर रहे हों, उन्हें राज्य सरकार के नियमों और आरटीई अधिनियम के दायित्वों का पालन करना होगा।
अदालत ने कहा कि किसी अन्य बोर्ड से संबद्धता स्कूलों को आरटीई के नियमों से छूट नहीं देती है। बेसिक शिक्षा अधिकारियों और जिला विद्यालय निरीक्षकों के माध्यम से प्रदेश के सभी निजी स्कूलों की जिलावार सूची तैयार कर उसमें जूनियर बेसिक, जूनियर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर पर नामांकित आरटीई छात्रों की संख्या अलग-अलग दर्ज करने का निर्देश दिया गया है।
कोर्ट के इस आदेश से निजी स्कूलों में आरटीई के तहत होने वाले दाखिलों की स्थिति स्पष्ट होने और पात्र बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

