20 August 2026

यूपी बोर्ड: इंटरमीडिएट में 80 नंबर की होगी लिखित परीक्षा

प्रयागराज। यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट लिखित परीक्षा अब 80 अंकों की होगी, जबकि 20 अंक प्रयोगात्मक परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित किए जाएंगे। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ)-2023 और राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र परख की सिफारिशों के आधार पर किया जा रहा है। अगले शैक्षिक सत्र से इसे कक्षा 11 से लागू करने की तैयारी है।

वर्तमान में यूपी बोर्ड में इंटरमीडिएट स्तर पर भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और गृह विज्ञान जैसे विषयों में 70 अंक की लिखित परीक्षा और 30 अंक की प्रयोगात्मक परीक्षा होती है। वहीं हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, अर्थशास्त्र जैसे गैर-प्रायोगिक विषयों में 100 अंक की लिखित परीक्षा होती है। अब गैर-प्रायोगिक विषयों में भी 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के और 80 अंक लिखित परीक्षा के होंगे।

राज्य शिक्षा संस्थान के विशेषज्ञों ने कक्षा 11 और 12 के लिए इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र एवं नागरिक शास्त्र जैसे विषयों के प्रश्नपत्र तैयार किए हैं। इनके अनुसार, नए प्रश्नपत्रों में सर्वाधिक 35 प्रतिशत प्रश्न अनुप्रयोग आधारित होंगे। पहले बोर्ड के प्रश्नपत्रों में ज्ञान (20%), बोध (30%), अनुप्रयोग (30%) और कौशल (20%) का मूल्यांकन किया जाता था। अब नए प्रारूप में छह बिंदुओं—ज्ञान (17.5%), बोध (17.5%), अनुप्रयोग (35%), विश्लेषण (22%), मूल्यांकन (4%) और सृजन (4%)—के आधार पर विद्यार्थियों का आकलन किया जाएगा।

नए सिरे से तैयार प्रश्नपत्रों में प्रत्येक यूनिट से प्रश्न पूछना अनिवार्य किया गया है और प्रत्येक यूनिट का अधिभार भी निर्धारित किया गया है। बहुविकल्पीय प्रश्न नहीं रखे गए हैं, ताकि छात्र हर यूनिट को पढ़ने के लिए प्रेरित हों। प्रायोगिक प्रश्नों की संख्या में भी कमी की गई है। प्रत्येक विस्तृत उत्तरीय प्रश्न में आंतरिक विकल्प के रूप में ऐसे प्रश्न दिए गए हैं, जो उसी यूनिट, उसी उद्देश्य और उसी कठिनाई स्तर के होंगे।

राज्य शिक्षा संस्थान के प्राचार्य राजेंद्र प्रताप ने कहा कि एक संतुलित प्रश्नपत्र तैयार किया गया है, जिसमें प्रश्नों के उद्देश्य, प्रकार, कठिनाई स्तर तथा प्रश्नों पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रश्नों का स्वरूप ऐसा रखा गया है कि छात्र केवल रटकर उत्तर देने के बजाय समझकर और दैनिक जीवन में अनुप्रयोग के आधार पर उत्तर दें। इससे बच्चों में चिंतन, आलोचनात्मक सोच और समस्या समाधान कौशल का विकास होगा।