17 September 2026

सुप्रीम कोर्ट ने 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई में किया सवाल, जब टीईटी सिर्फ पात्रता परीक्षा है, यह दोहरा आरक्षण कैसे?

 

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सवाल किया कि जब शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) सिर्फ पात्रता परीक्षा है और आरक्षित श्रेणी का उम्मीदवार शिक्षक भर्ती में आरक्षण की मांग कर रहा है तो यह दोहरा आरक्षण कैसे हुआ? शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में 19 हजार आरक्षित सीटों पर अनारक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को नियुक्त किए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की।



न्यायमूर्ति एस.वी.एन. भट्टी और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने यह टिप्पणी तब की, अनारक्षित श्रेणी के शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने आरक्षित श्रेणी के टीईटी में भी आरक्षण का लाभ ले चुके हैं और सहायक शिक्षक भर्ती में भी आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने पीठ से कहा कि ये दोहरा आरक्षण नहीं ले सकते। इस पर शीर्ष अदालत ने कहा जब टीईटी सिर्फ पात्रता परीक्षा है, यह दोहरा आरक्षण कैसे हुआ?’ चयनित शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गुप्ता ने पीठ से कहा कि कहा कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में उम्र सीमा, फीस तथा अंकों में छूट दी गई है यह रिजर्वेशन की श्रेणी में आता है। इस पर पीठ ने कहा कि संविधान उन्हें उनका अधिकार देता है तो आप कैसे रोक सकती है। पीठ ने यह भी कहा कि छूट (रिलैक्सेशन) आरक्षण नहीं हो सकता। वरिष्ठ अधिवक्ता बहस की अनारक्षित श्रेणी के चयनित शिक्षकों की ओर से सहायक शिक्षक भर्ती की घटना क्रम का विस्तार से जानकारी दी। पीठ को बताया गया कि यदि 13 अगस्त 2024 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ पीठ के फैसले का पालन किया जाता है तो बड़े पैमाने पर पिछले 6 साल से नौकरी कर रहे शिक्षक सेवा से बाहर हो जाएंगे।


अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 22 सितंबर तय की है।