श्रेणी दो और तीन में नॉर्मलाइजेशन या उत्तरकुंजी के आधार पर कम अंक मिलने की शिकायत थी। ऐसे प्रत्यावेदनों पर आयोग का निर्णय है कि परीक्षा से पहले विज्ञप्ति व विज्ञापन में उल्लेख किया गया था कि यदि परीक्षा एक से अधिक दिनों / पालियों में आयोजित की जाती है तो अभ्यर्थियों के तुलनात्मक स्कोर के लिए नॉर्मलाईजेशन की प्रक्रिया लागू होगी। इसमें विभिन्न पालियों में प्रस्तुत प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर के तुलनात्मक मूल्यांकन के लिए उच्च स्तर के सॉफ्टवेयर आधारित वैज्ञानिक सूत्र का प्रयोग करते हुए मूल्यांकन कर परीक्षाफल तैयार किया गया है। अन्य परीक्षा संस्थाओं द्वारा अपनाई गई इस प्रक्रिया को विभिन्न न्यायालयों ने भी सही माना है, यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। लिहाजा प्रत्यावेदनों के जरिए मांगा गया अनुतोष स्वीकार योग्य नहीं है।

