लखनऊ: प्रदेश के 50 से कम छात्र नामांकन वाले परिषदीय विद्यालयों की तरह अब माध्यमिक विद्यालयों की भी विलय की प्रक्रिया में शामिल होंगे। इसमें परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों की पेयरिंग क्लस्टर व परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों की पेयरिंग तीन किमी की दूरी पर की जाएगी। विलय के बाद विद्यालयों का संचालन करने की प्रक्रिया के संबंध में निर्देश दिए गए हैं।
अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार की ओर से जिलों को भेजे गए पत्र में यह फिर स्पष्ट कहा गया है कि विलय के बाद विद्यालयों के सभी संसाधनों का समुचित उपयोग व अन्य विद्यालयों में समायोजन किया जाएगा। इसी तरह, 50 या उससे अधिक छात्र नामांकन वाले विद्यालयों के विलय की प्रक्रिया के बाद सभी विद्यालयों का संचालन किया जाएगा। 30 जुलाई को जारी निर्देशों की कड़ाई से पालन पर भी बल दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रदेश के छोटे-छोटे स्कूल और कम नामांकन वाले विद्यालयों में विलय के बाद सारी गतिविधियां साथ संचालित की जाएंगी। शिक्षा मंत्रालय ने पिछले वर्ष जारी निर्देशों में बेसिक निदेशक स्कूल शिक्षा विभाग को भी निर्देश दिए हैं। तदनुसार, अवशेष भवन, संसाधनों का समायोजन संबंधित विद्यालय में किया जाएगा या पुनर्निर्माण (मर्जर) की इमारत व संसाधनों का समन्वय विधिवत सुनिश्चित किया जाए।