नई दिल्ली,संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या असंतुलन से जुड़े सवाल के जवाब पर कहा कि यह चिंता का विषय है। उन्होंने प्रत्येक भारतीय परिवार में तीन बच्चों को सही बताया और कहा कि इससे ज्यादा बच्चे नहीं होने चाहिए।
भागवत ने कहा कि भारत के सभी समुदायों में जनसंख्या दर कम हो रही है। बढ़ा हुआ मानव श्रम देश के लिए ताकत भी है। भागवत ने घुसपैठ रोकने के लिए समाज से भी आह्वान किया और कहा कि केवल देश के लोगों को ही काम देना चाहिए। अवैध रूप से देश में आए लोगों को काम नहीं देना चाहिए।
आक्रांताओं के नाम हटाना सही: सड़क और शहरों के नाम बदलने के सवाल पर मोहन भागवत ने कहा कि देशभक्ति के आधार पर नाम होने चाहिए। इससे प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने कहा कि आक्रांताओं के नाम नहीं होने चाहिए। मैंने मुस्लिम के नाम न हो ऐसा नहीं कहा। एपीजे, अब्दुल हमीद का नाम होना चाहिए। आक्रमणकारियों के नाम पर शहरों और रास्तों के नाम नहीं होने चाहिए। इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। इसलिए वीर अब्दुल हमीद और अब्दुल कलाम के नाम पर होने चाहिए। जो प्रेरणा हमें राम प्रसाद बिस्मिल से मिलती है, वह अशफाकउल्ला खां से भी मिलती है। भागवत ने नई शिक्षा नीति की सराहना की। उन्होंने फिनलैंड का उदाहरण देते हुए कहा कि गुरुकुल शिक्षा का मतलब आश्रम में रहना नहीं, देश की परंपराओं को सीखना है। भागवत ने कहा कि जाति व्यवस्था कभी थी, लेकिन अब उसकी जरूरत नहीं है। अगर इस तरह की कोई बात कहीं लिखी गई है तो उसे मानने की जरूरत नहीं है। भारतीय संतों ने इस बारे में अपना विचार दिया है। भावगत ने कहा कि अब स्मृति भी नए तरीके से लिखने की जरूरत है।
जाति अब कोई व्यवस्था नहीं रही, यह पुरानी हो चुकी है और इसे खत्म होना ही होगा। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक इस दिशा में काम कर रहे हैं।
अमेरिकी टैरिफ पर संघ प्रमुख की दो टूक
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ सरकार को यह नहीं बताएगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कैसे निपटा जाए। उन्हें पता है कि क्या करना है, हम उसका समर्थन करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मित्रता पर दबाव नहीं होना चाहिए। भागवत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और अमेरिका द्वारा लगाए गए शुल्कों के बारे में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए यह टिप्पणी की।