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06 January 2026

गलत आदेश पर अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की मध्यप्रदेश के न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ गलत या त्रुटिपूर्ण न्यायिक आदेशों के आधार पर न्यायपालिका के अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती। इस टिप्पणी के साथ शीर्ष अदालत ने मध्यप्रदेश के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्धय सिंह सुलिया की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया।


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह का कदम न्यायिक स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और न्यायालय के जजों में अनावश्यक भय का वातावरण पैदा करता है। जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुलिया की अपील को स्वीकार करते हुए सितंबर 2015 के बर्खास्तगी आदेश और उसे बरकरार रखने वाले हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया। पीठ ने सुलिया को सेवा में बहाल करने का निर्देश भी दिया है।


दोहराए मानदंड अपनाने का था आरोप


न्यायाधीश सुलिया पर भ्रष्टाचार और मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत दर्ज मामलों में जमानत याचिकाओं पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप था। उन्होंने 50 बल्क लीटर से अधिक शराब बरामदगी वाले कुछ मामलों में जमानत दी थी, जबकि समान परिस्थितियों में अन्य मामलों में जमानत से इंकार किया।


सभी लाभ देने के निर्देश


बर्खास्तगी रद्द करते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि उन्हें सेवानिवृत्ति आयु तक सेवा में निरंतर माना जाए तथा पूर्ण वेतन और समस्त सेवा लाभ दिए जाएं। कोर्ट ने कहा कि इन लाभों का भुगतान आठ सप्ताह के भीतर छह प्रतिशत ब्याज के साथ किया जाए। साथ ही शीर्ष अदालत ने निर्णय की प्रति सभी हाईकोर्ट को भेजने का निर्देश भी दिया है।

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