जनवरी में भी अटकी डीएलएड प्रवेश प्रक्रिया, सत्र नियमित होने पर संकट
लखनऊ। प्रदेश में डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) सत्र की प्रवेश प्रक्रिया जनवरी में भी शुरू नहीं हो सकी है। सत्र की शुरुआत को लेकर लगातार हो रही देरी के चलते शैक्षणिक कैलेंडर पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। हालात यह हैं कि सत्र समाप्त होने में अब कुछ ही महीने शेष हैं, लेकिन प्रवेश प्रक्रिया अब तक पटरी पर नहीं लौट सकी है।
रजिस्ट्रेशन की तिथि बढ़ाने की तैयारी
शिक्षा विभाग सूत्रों के अनुसार, छात्रों को एक और मौका देने के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अंतिम निर्णय होने के बाद ही आगे की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो पाएगी।
सीटों के मुकाबले कम आवेदन
इस वर्ष डीएलएड में 2.40 लाख सीटों के सापेक्ष केवल 1.60 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि देरी और अनिश्चितता के कारण अभ्यर्थियों की रुचि कम हुई है। पिछले वर्ष फरवरी 2025 तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो गई थी, जबकि इस बार जनवरी बीतने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
योग्यता विवाद से बढ़ी परेशानी
डीएलएड में प्रवेश की योग्यता को लेकर लंबे समय तक चला विवाद भी देरी का बड़ा कारण बना। पहले यह मामला न्यायालय में लंबित रहा। अक्टूबर में निर्णय आने के बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई, जो दिसंबर में समाप्त हुई। इसके बावजूद अभी तक मेरिट सूची और प्रवेश कार्यक्रम जारी नहीं हो सका है।
डीएलएड की जगह बीएलएड की तैयारी
इसी बीच शिक्षा मंत्रालय की ओर से डायट संस्थानों को अपग्रेड करने की योजना पर काम चल रहा है। आने वाले वर्षों में डीएलएड की जगह चार वर्षीय बीएलएड पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी है। बीएलएड में प्रवेश के लिए इंटरमीडिएट को न्यूनतम योग्यता माना जाएगा। इसके बाद अभ्यर्थी बेसिक और माध्यमिक दोनों स्तरों पर शिक्षक भर्ती के लिए पात्र होंगे।
सीटें खाली रहने की आशंका
परीक्षा नियामक प्राधिकारी अनिल भूषण चतुर्वेदी के अनुसार, सीटों के सापेक्ष कम आवेदन मिलने से इस वर्ष भी बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने की आशंका है। कॉलेजों की ओर से आवेदन तिथि बढ़ाने की मांग की गई है। शासन से अनुमति मिलने के बाद प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही सत्र को नियमित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
छात्रों में बढ़ी चिंता
प्रवेश में हो रही लगातार देरी से अभ्यर्थियों में असमंजस और चिंता का माहौल है। बड़ी संख्या में छात्र डायट और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के चक्कर काट रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो इसका सीधा असर सत्र और शिक्षण गुणवत्ता पर पड़ेगा।

