दस वर्ष में उच्च शिक्षा में 31.5 प्रतिशत बढ़ा नामांकन, 4.5 करोड़ छात्रों ने लिया दाखिला
नई दिल्ली। देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पिछले एक दशक में नामांकन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 से 2023-24 के बीच उच्च शिक्षा में नामांकन 31.5 प्रतिशत बढ़ा है। इस अवधि में उच्च शिक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या में करीब 1.08 करोड़ की वृद्धि हुई।
वर्ष 2014-15 में देश में उच्च शिक्षा में करीब 3.42 करोड़ विद्यार्थी नामांकित थे, जो 2023-24 में बढ़कर करीब 4.5 करोड़ हो गए। यानी दस वर्षों में लगभग 1.08 करोड़ छात्रों की बढ़ोतरी हुई है।
लड़कियों के नामांकन में भी बड़ा इजाफा
उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2014-15 में करीब 1.37 करोड़ छात्राएं उच्च शिक्षा में नामांकित थीं, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गईं। इस तरह छात्राओं के नामांकन में करीब 67 लाख यानी 42.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च शिक्षा में छात्राओं की भागीदारी बढ़ना इस क्षेत्र में आए प्रमुख बदलावों में से एक है।
उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
शिक्षा मंत्रालय के फेक्टशीट के अनुसार, उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) भी बढ़ा है। वर्ष 2014 में यह 23.7 प्रतिशत था, जो 2022-23 में बढ़कर 29.5 प्रतिशत और 2023-24 में 30 प्रतिशत हो गया।
सरकार के राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के लक्ष्य के तहत वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में जीईआर को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
विश्वविद्यालयों की संख्या भी बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार, उच्च शिक्षा के विस्तार के साथ विश्वविद्यालयों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 760 से बढ़कर 1,289 हो गई। करीब 529 विश्वविद्यालय जुड़े, जबकि इसमें 69.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
कॉलेजों की संख्या भी बढ़ी है। करीब 18,500 कॉलेज जुड़ने से इनकी संख्या 38,498 से बढ़कर 48,246 हो गई। वहीं स्टैंडअलोन संस्थानों की संख्या 12,376 से बढ़कर 15,221 पहुंच गई।
उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव
आंकड़े बताते हैं कि पिछले दस वर्षों में उच्च शिक्षा तक पहुंच का दायरा बढ़ा है। विशेष रूप से छात्राओं के नामांकन और उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या में वृद्धि इस बदलाव के महत्वपूर्ण संकेतक हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में उच्च शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात को और बढ़ाना है।

