31 August 2026

‘बच्चों के लिए पहले खुद किताब उठानी होगी’, शिक्षा निदेशालय में खुला सार्वजनिक पुस्तकालय: पार्थ सारथी सेन शर्मा

  डिजिटल युग में बच्चों की किताबों से बढ़ती दूरी समाप्त करने के उद्देश्य से माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से रविवार को अभिनव पहल की गई। शिक्षा निदेशालय में स्क्रीन से पन्नों की ओर पठन संस्कृति उत्सव आयोजित किया गया जिसमें लब्ध प्रतिष्ठित लेखकों ने किताबें पढ़ने के महत्व को रेखांकित किया।



लेखक से संवाद विषयक सत्र में मुख्य अतिथि बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव और लेखक पार्थसारथी सेनशर्मा के साथ विशिष्ट अतिथि साहित्य अकादमी पुरस्कार 2023 की विजेता प्रो. नीलम सरन गौर ने पढ़ाई के महत्व पर विचार रखे। प्रो. नीलम सरन गौर ने कहा कि साहित्य मेरे लिए विषय नहीं जीवन की धड़कन है। रचनात्मकता में जब आप कुछ करते हैं तो ऐसा लगता है कि पूरे ब्रह्मांड की ताकत आपकी मदद कर रही हो। आज के समय में विद्यार्थियों में पाठ्यक्रम के अलावा दूसरी किताबें पढ़ने के लिए ललक बनाए रखना जरूरी है।


पार्थसारथी सेनशर्मा ने कहा कि यात्राएं व्यक्ति के सोच का दायरा बढ़ती हैं और संकीर्णता से दूर करती है। पार्थसारथी सेनशर्मा ने कहा कि आपके पास ज्ञान कितना भी हो, मूल्यांकन उसका होता है जो आपने लिखा हो। इसलिए पढ़ना जरूरी है, पढ़ाई को सिर्फ अंकों तक सीमित रखना गलत होगा। पढ़ना आनंद के लिए होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से भी गुजारिश की कि बच्चों को उनकी पसंद की किताबें पढ़ने दीजिए।


अपर मुख्य सचिव पार्थसारथी सेनशर्मा ने रविवार को शिक्षा निदेशालय में सार्वजनिक पुस्तकालय का उद्घाटन और सदस्यता का शुभारंभ किया। खास बात यह है कि कोई भी व्यक्ति नि:शुल्क पुस्तकालय का सदस्य बन सकता है। 200 रुपये सुरक्षा निधि जमा करनी होगी जो सदस्यता छोड़ने पर वापस हो जाएगी। सदस्य अपनी रुचि की किताब 15 दिन के लिए ले जा सकेंगे।