भारत में अगले साल मार्च से 'एक देश, एक समय' की शुरुआत IST अनिवार्य किया जाएगा, नियमों के अनुपालन के लिए 180 दिन का समय
नई दिल्ली। भारत ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 'एक देश, एक समय' की ओर बढ़ने के लिए नई नीति जारी की है। केंद्र सरकार ने भारतीय मानक समय (आईएसटी) को अनिवार्य करने के लिए नियमों की अधिसूचना जारी कर दी है। इन नियमों के तहत मार्च 2027 से पूरे देश में सभी कानूनी, प्रशासनिक और डिजिटल कार्यों में आईएसटी एकमात्र मानक होगा।
नियमों की मुख्य बातें
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नीति पूरे भारत में घड़ियों का एक समान समय सुनिश्चित करने के लिए लाई गई है। वर्तमान में देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग समय प्रणाली चल रही है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में समस्या होती है।
सरकार के मुताबिक, जब पूरे देश में घड़ी का समय एक हो तो 'एक देश, एक समय' की अवधारणा पूरी होगी। दरअसल, देश में भले ही घड़ी का समय पहले से ही एक है, लेकिन उसका ज्ञान एक नहीं है। आमतौर पर लग सकता है कि इससे फर्क नहीं पड़ता, लेकिन यह आपके पैसे, सुरक्षा और देश की सुरक्षा सबसे जुड़ा मामला है।
डिजिटल दुनिया में महत्वपूर्ण
दरअसल, बैंक, सर्वर, बिजली ग्रिड और दूसरे सिस्टम समय के ज्ञान पर निर्भर हैं। नए नियमों का प्रमुख मक्सद विदेशी सेटेलाइट पर निर्भरता घटाना है। इसके साथ ही डिजिटल दुनिया में मिलीसेकंड का अंतर बड़ा मामला हो सकता है।
डिजिटल प्रमाणीकरण में सुधार
सरकार का कहना है कि 'एक देश, एक समय' पहल के तहत डिजिटल रेजिस्ट्रेशन नेटवर्क शुरू किया जाएगा। इससे विभिन्न जीपीएस पर निर्भरता समाप्त होगी और नई तकनीक का प्रयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य हजारों जुड़े हुए उपकरणों के बीच एक नैनोसेकंड से भी कम समय का सटीक तालमेल स्थापित करना है।
180 दिन का समय अवधि
सभी संस्थाओं को इस नीति का पालन करने के लिए 180 दिन का समय दिया गया है। इस अवधि में सभी को आईएसटी के अनुसार अपने सिस्टम को अपडेट करना होगा। नई नीति का प्रमुख मक्सद विदेशी उपग्रह पर निर्भरता को कम करना है।
समय-स्टैंपिंग अनिवार्य
भी बहुत मायने रखता है, इसलिए सही टाइम स्टैपिंग बेहद जरूरी है। टाइम-स्टैप निश्चित समय का सटीक रिकॉर्ड होता है, जो बताता है कि कोई कारबार कब हुई।
भविष्य की योजना
सरकार ने जाहिर किया है कि यह पहला कदम है। आने वाले समय में और भी सुधार किए जाएंगे। इसके तहत राष्ट्रीय समय मानक को और मजबूत किया जाएगा ताकि भारत पूरी तरह आत्मनिर्भर हो सके।

