31 August 2026

संविदा शिक्षकों को आयु सीमा में छूट, एमसीडी स्कूलों के दो हजार शिक्षकों को लाभ

 नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम के विद्यालयों में संविदा पर लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) से बड़ी राहत मिली है। कैट ने चार अभ्यर्थियों को आयु सीमा में छूट देने और योग्यता के आधार पर सहायक अध्यापक (नर्सरी) (महिला) के पद पर दो महीने में नियुक्ति करने का निर्देश दिया है। इस फैसले का लाभ अन्य संविदा शिक्षकों को भी मिलेगा।



न्यायिक सदस्य मनीष गर्ग और प्रशासनिक सदस्य डॉ. आनंद एस. खाती की पीठ ने पिंकी मौर्य एवं अन्य बनाम दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड के मामले में यह आदेश दिया है। मामला उन संविदा शिक्षकों से संबंधित है, जो कई वर्षों से एमसीडी स्कूल में सेवाएं दे रहे थे, लेकिन डीएसएसएसबी द्वारा नियमित भर्ती में निर्धारित अधिकतम आयु सीमा (30 वर्ष) पार कर चुके हैं। पीठ ने माना कि इन शिक्षकों का अनुभव मायने रखता है। ये शिक्षक उसी श्रेणी के छात्रों को कई वर्षों से पढ़ा रहे हैं। इसलिए इनकी योग्यता को ध्यान में रखते हुए ये नियमित भर्ती में आयु में छूट के हकदार हैं। अंतरिम आदेश के तहत अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में अस्थायी रूप से भाग लेने की अनुमति दी गई थी। बाद में उनके परिणाम सीलबंद लिफाफे में पीठ के समक्ष पेश किए गए। नतीजों की जांच के बाद कैट ने पाया कि पिंकी मौर्य, अंजू बाला, सरोज बाला व सविता कुमारी मान ने निर्धारित कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए है।


इसके बाद पीठ ने चारों के पक्ष में आवेदन स्वीकार करते हुए अधिकारियों को आयु सीमा में छूट देने तथा योग्यता व अन्य भर्ती शर्तों की पूर्ति के अधीन सहायक अध्यापक (नर्सरी) (महिला) पद पर उनकी नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया है।


एमसीडी स्कूलों के दो हजार शिक्षकों को लाभ


कैट के इस फैसले का लाभ निगम में संविदा पर लंबे समय से कार्यरत 2099 शिक्षकों को मिलेगा। पीठ ने स्पष्ट किया कि इन चारों की नियुक्ति नई नियुक्ति मानी जाएगी। उनकी नियुक्ति भविष्य में रिक्तियों के विरुद्ध की जा सकती है या उनके लिए अतिरिक्त पद सृजित किए जा सकते हैं। यह प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के दो महीने के भीतर पूरी करने को कहा गया है।


उच्चतम न्यायालय ने माना था एमसीडी कर्मचारी


न्यायाधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के यूपीएससी बनाम डॉ. जमुना कुरुप एवं अन्य के फैसले पर भरोसा किया, जिसमें संविदा पर कार्यरत एमसीडी कर्मचारियों को आयु में छूट के उद्देश्य से एमसीडी कर्मचारी माना गया था। कैट ने कहा, यदि विज्ञापन में किसी लाभ को केवल स्थायी या नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं किया गया है, तो संविदा कर्मचारियों को उस लाभ से बाहर नहीं किया जा सकता।